British Brutality & Resistance: The Story of Maulvi Ahmadullah Sadiqpuri and his family | Patna
Автор: Lost Muslim Heritage Of Bihar
Загружено: 2025-05-19
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भारत की जंग ए आज़ादी के गुमनाम हीरो: पटना के मौलवी अहमदुल्लाह सादिक़पुरी की कुर्बानी की सच्ची कहानी
यह विवरण पटना में 1857 की क्रांति और उसके बाद के वर्षों में मौलवी अहमदुल्लाह सादिक़पुरी और उनके परिवार के साथ अंग्रेज़ों द्वारा किए गए अत्याचारों की कहानी है। इसका सार इस प्रकार है:
1857 की बग़ावत की पृष्ठभूमि में पटना:
बिहार के कई हिस्सों में विद्रोह शुरू हो चुका था। पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने विद्रोहियों को तीन भागों में बांटा – वहाबी, लखनऊ से आए लोग, और आपराधिक तत्व।
जून 1857 में सादिक़पुर के तीन मौलवी (मुहम्मद हुसैन, अहमदुल्लाह, वैज़ उल हक़) को धोखे से गिरफ़्तार किया गया।
3 जुलाई 1857 को पीर अली के नेतृत्व में पटना में बग़ावत हुई, जिसके बाद अंग्रेज़ों ने सैकड़ों लोगों को फाँसी दी।
टेलर को बढ़ते दबाव के चलते 4 अगस्त को सस्पेंड कर दिया गया। और सादिक़पुर के तीनो मौलवी छोड़ दिए गए।
मौलवी अहमदुल्लाह सादिक़पुरी का संघर्ष:
1860 में उन्हें डिप्टी कलेक्टर बनाया गया लेकिन वे गुप्त रूप से अंग्रेज़ विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे।
उन्होंने अम्बाला पास इलाक़े में विद्रोह संगठित किया।
1864 में उन्हें दोबारा गिरफ़्तार किया गया, झूठे गवाहों के आधार पर पहले फाँसी की सज़ा दी गई, जो बाद में उम्रक़ैद में बदली गई। 1865 में उन्हें अंडमान भेज दिया गया।
उनका अंत और परिवार की त्रासदी:
उनके छोटे भाई यहिया अली 1868 में अंडमान में ही मारे गए।
मौलवी अहमदुल्लाह का देहांत 21 नवंबर 1881 को अंडमान में हुआ।
उनके रिश्तेदार मौलवी अब्दुर रहीम को 20 साल बाद 1884 में रिहा किया गया, लेकिन सादिक़पुर लौटने पर उन्हें अपना घर और पूर्वजों की कब्रें नहीं मिलीं – अंग्रेज़ों ने उन्हें मिटा दिया था।
उनकी ज़मीन और मकान पर सरकारी इमारतें बना दी गईं, और उनकी सम्पत्ति से पटना कॉलेज, नगर निगम और मंगल तालाब की स्थापना की गई।
निष्कर्ष:
मौलवी अहमदुल्लाह सादिक़पुरी और उनके परिवार ने देश की आज़ादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन आज़ादी की लड़ाई में उनकी भूमिका को भुला दिया गया। उनके बेटे हकीम अब्दुल हमीद ने इस अन्याय को बेहद मार्मिक शब्दों में बयान किया।
अहमदुल्लाह बूद ए मुजरिम शाह - तिफ़लके बेगुनाह रा चे गुनाह
अहमदुल्लाह तो सरकार के मुजरिम थे, इसलिए इनके ख़िलाफ़ हुई करवाई समझ आती है, पर उनके बेगुनाह बच्चों का क्या क़सूर था?
The Unsung Hero of 1857: The Untold Story of Maulvi Ahmadullah Sadiqpuri’s Sacrifice
Forgotten Freedom Fighter: Maulvi Ahmadullah Sadiqpuri and the 1857 Revolt
British Brutality & Resistance: The Story of Maulvi Ahmadullah Sadiqpuri
Buried History: How the British Erased a Hero of 1857
India’s Forgotten Martyr: Maulvi Ahmadullah’s Fight Against the British
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