#कौशाम्बी
Автор: T B NEWS LIVE
Загружено: 2023-05-08
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आजादी से पहले इलाहाबाद को मौलवी लियाकत अली ने करा दिया था आजाद, अंग्रेजों ने दिया काला पानी की सजा...
ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
कौशाम्बी : जनपद में चायल तहसील अंतर्गत महगांव के रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी मौलवी लियाकत अली ने सन 1857 में इलाहाबाद को आजादी से पहले ही एक बार आजाद करा दिया था, मौलवी लियाकत अली ने खुसरोबाग पर कब्जा करके उसे अपना शासन केन्द्र बना लिया था उन्होंने अंग्रेजों के थानों, तहसीलों में अपने आदमियों को डीएम, एसडीएम, तहसील, कोतवाल, दरोगा घोषित कर दिया था, मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर ने उन्हें इलाहाबाद का सूबेदार यानी राज्यपाल बनाया था, मौलवी साहब जंगी काउंसिल के मेंबर थे जिसमें कई महान स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे, वो ऐसे पहले स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने उस समय अंग्रेजों के शस्त्रागार इलाहाबाद किले को कब्जे में लेने का प्रयास किया था इसी दौरान अंग्रेजों का खजाना भी लूट लिया था जिसकी भनक जब अंग्रेजी फौज के क्रूर अधिकारी जनरल जेम्स जार्ज स्मिथ नील को लगी तो वह बड़ी फौज लेकर मौलवी लियाकत अली को तोड़ने के लिए खुसरो बाग पर हमला कर दिया, वहां भी मौलवी साहब ने जनरल नील का जमकर सामना किया जबकि अंग्रेजों की फौज ज्यादा थी इसीलिए उन्हें पीछे हटना पड़ा, खुसरो बाग से वह निकलकर फतेहपुर होते हुए कानपुर के रास्ते गुजरात चले गए, जिसके बाद अंग्रेजों के मुखबिरों की साजिश पर मुंबई महाराष्ट्र में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और पकड़ कर इलाहाबाद लाया गया, जहां पर कोतवाली थाना में उनके खिलाफ हत्या, देशद्रोह, लूटपाट से संबंधित कई धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया, मामला अंग्रेजों की कोर्ट तक गया जहां पर उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, सजा मिलने के बाद अंग्रेजों ने मौलवी लियाकत अली को हुकूमत के लिए खतरा जानकर अंडमान द्वीप के काला पानी की जेल में डाल दिया जहां पर सन 1892 में उनकी मृत्यु हो गई आज भी उनकी मजार अंडमान द्वीप पर मौजूद है, कोर्ट में पेशी के दौरान उनका एक दिलचस्प वाक्या आज भी मशहूर है जब अंग्रेजों के पोल नाम के जज ने उनसे सवाल किया था कि हम तुम्हारी जांबाजी से बहुत प्रभावित है अंग्रेजी हुकूमत के दुश्मन होने के बावजूद भी तुमने हमारे अधिकारी कर्मचारियों की महिलाओं और बच्चों का कोई नुकसान नहीं किया, तुम अगर अंग्रेजी हुकूमत की सरपरस्ती में आकर माफी मांग लो तो हम तुम्हें माफ कर सकते है, तब मौलवी लियाकत अली ने जवाब दिया था कि मैं किसी भी हाल पर माफी नहीं मांग सकता फिलहाल मुझे ऊपर वाले ने इंसान बनाया है अगर चूहा बनाया होता तो मैं तुम्हारे सारे अंग्रेजों को कूतर देता क्योंकि तुम सब मेरी मातृभूमि के चीर हरण करने का प्रयास करते रहते हो, मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं, मौलवी लियाकत अली की आवाज सुनकर अंग्रेजी न्यायधीश के भवे तन गई थी जिसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई ।
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