समयसार को ही अपना जीवन बनाओ ।
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सम्यक्त्व के आठ अंग (1 से 4 अंग तक)
वीतरागता की वृद्धि के लिए सम्यग्ज्ञानी को भेदज्ञान सहज होता है ।
"सुरत" को सांस में जोड़ने का "गुप्त गोपनीय भेद" !!SURAT KO SAANS ME JODNE KA GUPTA GOPNIYE VHAED.
स्वरूप की साधना ही हमारा ध्येय होना चाहिए ।
आरोपों की बौछार : अध्यात्म की अदालत (यूथ कन्वेंशन, गजपंथा, नाशिक, महाराष्ट्र : 25.01.2025
पंजाब में पहला सत्संग पार्ट 1 #योगी #पंजाब
2-जिनेंद्र अभिषेक, पूजन एवं ध्वजारोहण विधि,उद्घाटन,नांदी कलश विराजमान विधि और पंचकल्याणक उद्घाटन सभा
हमेशा अपने हित पर दृष्टि रखना , मोह के वश मत होना ।
#277. अनुमान से अनुभव नहीं होता | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, दोपहर. 24.01
उज्जवल पक्ष देखना सीखो 👌🏻🙇🏻🙏🏻 || डाॅ.हुकमचंद जी भारिल्ल || #drbharill #ptst #lifelessons
“ सहज तत्त्व मैं ही हूं ” - ऐसा जानते हुए अनुभव करने का प्रयत्न करना ।
सात तत्त्वों में भी एक सहज तत्त्व ही जयवंत वर्तता है ।
योगसार 199 समयसार पढ़कर कैसे जीव स्वच्छंदी हो जाता है
"असंभव" ....... | BY आचार्य शुचिषद मुनि जी | #gurukulwala #aryasamaj #trending
Ajit Pawar Plane Crash: अकाल मृत्यु क्यों होती है? Akal Mrityu Explained | Hare Krsna TV
🙏अंतिम समय का संबोधन, वि.राजकुमारी दिल्ली
3.याग मंडल विधान ,श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, हिमतनगर
भेदज्ञान से आत्मिक गुणों का विकास होता है ।
413 संयम प्रकाश क्या गृहस्थ ध्यान संभव🤔परिणाम विचित्र👌👍
जिनने किये धरम उनके फूटे करम - क्या कारण है की धर्मी जीवों को पाप का उदय ज्यादा आता है