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#278. अनुमान के अंग - प्रतिज्ञा & हेतु | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 25.01
#298. दुष्चिन्तन रोकना ही पुरुषार्थ है | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, दोपहर. 04.02
अध्यात्म की अदालत। डॉ. मनीष जी शास्त्री मेरठ। 2nd यूथ कन्वेंशन वर्कशॉप, सिद्धक्षेत्र गजपन्था
СРОЧНО! СОБИРАЙТЕ ВЕЩИ! ПАСХА 2026 ПРИБЛИЖАЕТСЯ! СТАРЕЦ ИЛИЙ ПРЕДСКАЗАЛ СУДЬБУ ПУТИНА И РОССИИ!
जे-जे ज्ञानलीन जीव, तेई-तेई वीतराग..... जैन भजन रचयिता-अनुभवप्रकाश शास्त्री, कानपुर
1. आत्मसिद्धि शास्त्र, श्रीमद् राजचंद्रजी। बाह्य आडंबर और शुष्क ज्ञानी दोनों ही मिथ्यादृष्टि हैं।
#294. किसी को कैसे टोके | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, दोपहर. 02.02
#111. आखिर राग होता क्यों है? | राग का कारण क्या है? | जबलपुर, रात्रि 21.10
ЗАПРЕЩЁННОЕ ПРОРОЧЕСТВО! Гурьянов видел ФИНАЛ! БОЛЬШОЙ переход случится ЛЕТОМ 2026 года!
आरोपों की बौछार : अध्यात्म की अदालत (यूथ कन्वेंशन, गजपंथा, नाशिक, महाराष्ट्र : 25.01.2025
#297. धैर्य समयसाध्य गुण है | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 04.02
Yogsar 194 बार बार पर्यायदृष्टि क्यों और कैस हो जाती है
आज़ादी या परतंत्रता ❓️👌🏻👍🏻 || पण्डित विवेक जी, छिन्दवाड़ा || #jainism #republicday
#296. पुरानी बातों को ताज़ा रखना अनंतानुबंधी है | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, दोपहर. 03.02
#सुनें #भक्त #शिष्य #क्या #कर रहे #आचार्यश्री के #गुण #क्यों #नहीं #नजर #आते, सुनें #विराट सागरजी को
3.याग मंडल विधान ,श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, हिमतनगर
जिनने किये धरम उनके फूटे करम - क्या कारण है की धर्मी जीवों को पाप का उदय ज्यादा आता है
#293. आत्मसाधना का सामान्य परिचय | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 02.02
Pravachan Acharya Samay Sagar Ji |28-01-26| मार्मिक मंगल प्रवचन | आचार्यश्री समयसागर जी महाराज
भेद विज्ञान कैसे करना चाहिए ? आ. बाल ब्रह्मचारी श्री सुमतप्रकाशजी | कोटा प्रवास 2023