वीतरागता की वृद्धि के लिए सम्यग्ज्ञानी को भेदज्ञान सहज होता है ।
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श्रद्धा - ज्ञान - चारित्र का नाम ही नियम है और सुखी होना ही सार है ।
हमेशा अपने हित पर दृष्टि रखना , मोह के वश मत होना ।
ГАРЕМ НКВД в Мисхоре: Как дочерей врагов народа превращали в наложниц чекистов
Баунов. Что обсуждают за закрытыми дверьми Россия, Украина и США
जैन कुल की बालिकाओं और उनके अभिभावकों से विनम्र मार्मिक अपील पं.संजयजीशास्त्रीजेवर जबलपुर पंचकल्याणक
जिनने किये धरम उनके फूटे करम - क्या कारण है की धर्मी जीवों को पाप का उदय ज्यादा आता है
ДРОЗД ,ЕГО ПЕНИЕ СНИМЕТ НЕРВНОЕ НАПРЯЖЕНИЕ,УСПОКОИТ,ПОДАРИТ РАДОСТЬ,УМИРОТВОРЕНИЕ И ПОКОЙ
ЛЕОНИД ДЕРБЕНЁВ знал ПРАВДУ о Пугачёвой! Зацепин, Гайдай, Магомаев - тайны ШОКИРУЮТ!
सम्यक्चारित्र में बाह्य क्रिया यथायोग्य होती है ।
“ सहज तत्त्व मैं ही हूं ” - ऐसा जानते हुए अनुभव करने का प्रयत्न करना ।
०१००८ वैराग्य कैसे उत्पन्न होता है ?? निज अवलोकन से वैराग्य उत्पन्न होता है !
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अध्यात्म की अदालत। डॉ. मनीष जी शास्त्री मेरठ। 2nd यूथ कन्वेंशन वर्कशॉप, सिद्धक्षेत्र गजपन्था
भावना योग्य पुरुषार्थ से सफल होती है ।
सात तत्त्वों में भी एक सहज तत्त्व ही जयवंत वर्तता है ।
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ПЕНИЕ СОЛОВЬЯ ИЗБАВЛЯЕТ ОТ УНЫНИЯ И ТРЕВОГИ.ДОВЕРЬТЕСЬ ПРИРОДЕ-ЭТО ЛУЧШИЙ ДОКТОР И УТЕШИТЕЛЬ.
०१०१२ यदि एक समय की जाननेवाली पर्याय भी मूल सार नहीं तो फिर क्या सार है ??