SEM 1,4,5 II BHARAT KA BHUGOL II भारत के वनों के छह प्रमुख प्रकार II वनों के संरक्षण के उपाय
Автор: Dept. of Geo MLSM COL
Загружено: 2026-02-13
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भारत के वनों के छह प्रमुख प्रकार II वनों के संरक्षण के उपाय
भारत में वनों के छः प्रमुख प्रकार
भारत में वनों का यह वर्गीकरण Champion & Seth (1968) द्वारा प्रस्तुत प्राकृतिक वनस्पति वर्गीकरण पर आधारित है, जिसे UPSC, NET, State PSC में सबसे अधिक पूछा जाता है।
1️⃣ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
(Tropical Evergreen Forests)
🔹 वितरण क्षेत्र
पश्चिमी घाट
अंडमान–निकोबार द्वीप समूह
उत्तर-पूर्वी भारत (असम, मेघालय, मिज़ोरम)
🔹 जलवायु व वर्षा
वर्षा: 200 सेमी से अधिक
तापमान: 25°–27°C
आर्द्रता अधिक
🔹 प्रमुख विशेषताएँ
वर्ष भर हरे रहते हैं
वृक्षों की ऊँचाई 40–60 मीटर
घने और बहु-स्तरीय (Multi-layered)
🔹 प्रमुख वृक्ष
आबनूस, महोगनी, रबर, सिनकोना
📌 फैक्ट
➡️ भारत में सबसे घने वन
➡️ आर्थिक दोहन कठिन
2️⃣ उष्णकटिबंधीय अर्ध-सदाबहार वन
(Tropical Semi-Evergreen Forests)
🔹 वितरण
पश्चिमी घाट
उत्तर-पूर्व भारत
🔹 वर्षा
150–200 सेमी
🔹 विशेषताएँ
सदाबहार और पर्णपाती वृक्षों का मिश्रण
संक्रमणशील वन (Transitional forests)
🔹 प्रमुख वृक्ष
सागौन, साल, बांस, गुलाब लकड़ी
📌 फैक्ट
➡️ ये वन सदाबहार वनों के क्षरण से बनते हैं
3️⃣ उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन
(Tropical Moist Deciduous Forests)
🔹 वितरण
गंगा का मैदान
पूर्वी भारत
हिमालय की तराई
🔹 वर्षा
100–200 सेमी
🔹 विशेषताएँ
ग्रीष्म ऋतु में पत्तियाँ गिरती हैं
भारत का सबसे अधिक वन क्षेत्र
🔹 प्रमुख वृक्ष
साल, सागौन, शीशम, महुआ
📌 फैक्ट
➡️ भारत के लगभग 45% वन क्षेत्र इसी प्रकार के हैं
4️⃣ उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन
(Tropical Dry Deciduous Forests)
🔹 वितरण
मध्य भारत
दक्कन का पठार
राजस्थान, गुजरात के भाग
🔹 वर्षा
70–100 सेमी
🔹 विशेषताएँ
अधिक समय तक पर्णहीन
वृक्ष कम घने
🔹 प्रमुख वृक्ष
सागौन, पलाश, तेंदू
📌 फैक्ट
➡️ वनोपज (तेंदूपत्ता) के लिए प्रसिद्ध
5️⃣ उष्णकटिबंधीय कंटीले वन
(Tropical Thorn Forests)
🔹 वितरण
राजस्थान
गुजरात
दक्षिण-पश्चिम पंजाब
हरियाणा
🔹 वर्षा
50 सेमी से कम
🔹 विशेषताएँ
छोटी पत्तियाँ या काँटे
जल संरक्षण के अनुकूल संरचना
🔹 प्रमुख वनस्पति
बबूल, खेजड़ी, कैक्टस
📌 फैक्ट
➡️ खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है
6️⃣ पर्वतीय वन
(Montane Forests)
🔹 वितरण
हिमालय
नीलगिरि, अन्नामलाई, पलनी पहाड़ियाँ
🔹 ऊँचाई के अनुसार प्रकार
1000–2000 मीटर: ओक, चेस्टनट
2000–3000 मीटर: देवदार, चीड़
3000 मीटर से ऊपर: अल्पाइन घास
🔹 विशेषताएँ
ऊँचाई के साथ वनस्पति बदलती है
📌 फैक्ट
➡️ देवदार हिमालय का प्रमुख वाणिज्यिक वृक्ष
भारत में वनों की स्थिति के नवीनतम आंकड़े 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2021' के अनुसार हैं, जो भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा जारी की गई है।
यहाँ प्रमुख तथ्य और आंकड़े दिए गए हैं:
1. कुल वन और वृक्ष आवरण (Total Forest and Tree Cover)
कुल क्षेत्र: भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण 8,09,537 वर्ग किलोमीटर है।
प्रतिशत: यह भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.62% है।
3. राज्यवार स्थिति (State-wise Status)
क्षेत्रफल के अनुसार सबसे अधिक वन: मध्य प्रदेश (1st), अरुणाचल प्रदेश (2nd), छत्तीसगढ़ (3rd)।
प्रतिशत के अनुसार सबसे अधिक वन: मिजोरम (84.53%), अरुणाचल प्रदेश (79.33%), मेघालय (76.00%)।
4. मैंग्रोव वन (Mangrove Cover)
कुल क्षेत्र: भारत में मैंग्रोव वन 4,992 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं।
वृद्धि: पिछली रिपोर्ट (2019) की तुलना में इसमें 17 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
5. कार्बन स्टॉक (Carbon Stock)
भारत के वनों में कुल कार्बन स्टॉक लगभग 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है।
भारत में वनों को हो रहे खतरों और उनके संरक्षण के उपायों के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी दी गई है।
1. भारत में वनों को खतरे (Threats to Forests in India)
भारत के वन पारिस्थितिक तंत्र को कई मानवीय और प्राकृतिक कारणों से खतरा है:
वनों की कटाई (Deforestation): कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे (सड़कों, बांधों) के विकास के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा जा रहा है।
अवैध कटाई (Illegal Logging): कीमती लकड़ी (जैसे- सागौन, चंदन) के लिए तस्कर वनों को नुकसान पहुँचाते हैं।
वनाग्नि (Forest Fires): गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने से न केवल पेड़ जलते हैं, बल्कि वन्यजीवों का आवास भी नष्ट हो जाता है।
अतिक्रमण (Encroachment): वन भूमि पर अवैध कब्जा करके खेती या घर बनाना एक बड़ी समस्या है।
चराई (Overgrazing): मवेशियों की अनियंत्रित चराई के कारण नए पौधे नहीं उग पाते।
2. वनों के संरक्षण के उपाय (Conservation Measures)
वनों को बचाने के लिए सरकार और समाज मिलकर प्रयास कर रहे हैं:
क) कानूनी उपाय (Legal Measures)
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980: यह वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग करने पर रोक लगाता है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: यह लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों की रक्षा करता है।
भारतीय वन अधिनियम, 1927: यह वनों के प्रबंधन और वन उपज के परिवहन को विनियमित करता है।
ख) प्रशासनिक और वैज्ञानिक उपाय
संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management - JFM): इसमें वन विभाग और स्थानीय ग्रामीण मिलकर वनों का संरक्षण करते हैं।
वनीकरण (Afforestation): खाली और बंजर भूमि पर पेड़ लगाना।
सामाजिक वानिकी (Social Forestry): सड़कों, नहरों के किनारे और गांवों में सामुदायिक भूमि पर पेड़ लगाना।
ग) तकनीकी उपाय
अग्नि शमन तकनीक (Firefighting Technology): वनाग्नि को रोकने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग।
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