SEM1 पृथ्वी की उत्पत्ति (Origin of the Earth) से संबंधित सिद्धांत, कांट AND लाप्लास की परिकल्पना
Автор: Dept. of Geo MLSM COL
Загружено: 2026-01-05
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पृथ्वी की उत्पत्ति (Origin of the Earth) से संबंधित सिद्धांतों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। यह वर्गीकरण इस आधार पर है कि ग्रहों की उत्पत्ति में कितने तारों का योगदान रहा है और आधुनिक विज्ञान इस बारे में क्या कहता है।
यहाँ इनका विस्तृत वर्गीकरण दिया गया है:
1. अद्वैतवादी या एक-तारक संकल्पना (Monistic / Parentless Hypothesis)
इन सिद्धांतों के अनुसार, सौरमंडल और पृथ्वी की उत्पत्ति एक ही तारे (सूर्य या उसके प्रारंभिक रूप) से हुई है। इसमें किसी दूसरे तारे की सहायता की आवश्यकता नहीं मानी गई।
कांट की वायव्य राशि परिकल्पना (Kant's Gaseous Hypothesis): इन्होंने माना कि आदि पदार्थ के कणों के टकराने से एक घूमती हुई निहारिका बनी, जिससे छल्ले अलग हुए और ग्रह बने।
लाप्लास की निहारिका परिकल्पना (Laplace's Nebular Hypothesis): इन्होंने कांट के सिद्धांत में सुधार करते हुए कहा कि एक पहले से ही गर्म और घूमती हुई निहारिका (Nebula) से एक ही छल्ला अलग हुआ, जो बाद में 9 छल्लों में बंट गया और ग्रह बने।
2. द्वैतवादी या द्वि-तारक संकल्पना (Dualistic / Binary Hypothesis)
इन सिद्धांतों के अनुसार, सौरमंडल की उत्पत्ति दो तारों (सूर्य और एक अन्य साथी तारा) के आपसी संपर्क या टकराव से हुई है।
चैम्बरलिन और मोल्टन की ग्राहाणु परिकल्पना (Chamberlin-Moulton Planetesimal Hypothesis): इनके अनुसार, एक विशाल तारा सूर्य के पास से गुजरा, जिसके गुरुत्वाकर्षण से सूर्य की सतह से धूल और कण अलग हो गए, जो बाद में जुड़कर ग्रह बने।
जेम्स जींस और जेफ्री की ज्वारीय परिकल्पना (Jeans and Jeffreys' Tidal Hypothesis): इन्होंने बताया कि पास से गुजरने वाले तारे के ज्वारीय खिंचाव के कारण सूर्य से एक 'सिगार' (Cigar) के आकार का फिलामेंट बाहर निकल गया, जिससे ग्रह बने।
रसेल की द्वैध तारा परिकल्पना (Russell's Binary Star Hypothesis): इन्होंने माना कि सूर्य का एक साथी तारा था और ग्रहों का निर्माण उस साथी तारे के विखंडन से हुआ।
3. आधुनिक संकल्पना (Modern Hypotheses)
आधुनिक सिद्धांत केवल पृथ्वी नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की व्याख्या करते हैं। यह वर्तमान में सबसे अधिक वैज्ञानिक और सर्वमान्य श्रेणी है।
बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory): इसे 'विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना' भी कहते हैं। एडविन हबल ने इसे आधार दिया। इसके अनुसार, लगभग 13.8 अरब साल पहले एक अत्यंत छोटे और सघन बिंदु (Singularity) में महाविस्फोट हुआ, जिससे ब्रह्मांड का तेजी से विस्तार हुआ और गैलेक्सियों व सौरमंडल का निर्माण हुआ।
होयल का स्थिर अवस्था सिद्धांत (Steady State Theory): हालांकि अब यह बहुत लोकप्रिय नहीं है, लेकिन इसने ब्रह्मांड को हमेशा एक जैसा रहने वाला बताया था।
हॉट्ज वेइज़ेकर की गैस धूल संकल्पना: इन्होंने धूल और गैस के बादलों के बीच घर्षण को ग्रहों के निर्माण का कारण माना।
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