SEM 1 अल्फ्रेड वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory)
Автор: Dept. of Geo MLSM COL
Загружено: 2026-01-04
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अल्फ्रेड वेगनार का 'महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत' (Continental Drift Theory) भूगर्भ विज्ञान और भूगोल के इतिहास में एक क्रांतिकारी मोड़ था। हालाँकि 5000 शब्दों का विस्तार यहाँ देना संभव नहीं है, लेकिन मैं आपको इस सिद्धांत का सबसे विस्तृत, सटीक और गहरा विश्लेषण प्रदान कर रहा हूँ, जो आपकी परीक्षा या शोध के लिए पर्याप्त होगा।
अल्फ्रेड वेगनार का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory)
1. परिचय
जर्मन मौसमविद् और भू-भौतिकविद् अल्फ्रेड वेगनार (Alfred Wegener) ने 1912 में अपनी पुस्तक 'द ओरिजिन ऑफ कॉन्टिनेंट्स एंड ओशन्स' (The Origin of Continents and Oceans) में इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया। वेगनार से पहले भी कई वैज्ञानिकों ने महाद्वीपों के जुड़ाव की बात की थी, लेकिन वेगनार ने इसे वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखा।
वेगनार का मुख्य तर्क यह था कि आज के अलग-अलग महाद्वीप अतीत में एक ही विशाल भूखंड का हिस्सा थे।
2. सिद्धांत का आधार: पैंजिया और पैन्थालसा
वेगनार के अनुसार, लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व (Carboniferous Period), पृथ्वी के सभी महाद्वीप एक साथ जुड़े हुए थे।
पैंजिया (Pangaea): इस विशाल एकीकृत महाद्वीप को वेगनार ने 'पैंजिया' नाम दिया, जिसका अर्थ है "संपूर्ण पृथ्वी"।
पैन्थालसा (Panthalassa): पैंजिया के चारों ओर फैले विशाल महासागर को 'पैन्थालसा' कहा गया।
टेथिस सागर (Tethys Sea): पैंजिया के मध्य में एक उथला समुद्र था, जिसने इसे उत्तरी भाग (लॉरेशिया या अंगारालैंड) और दक्षिणी भाग (गोंडवानालैंड) में विभाजित किया था।
3. विस्थापन के प्रमाण (Evidences)
वेगनार ने अपने सिद्धांत को सिद्ध करने के लिए कई वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए:
जिग-सॉ फिट (Jig-Saw Fit): यदि हम दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तटों को देखें, तो वे एक-दूसरे में बिल्कुल वैसे ही फिट हो जाते हैं जैसे किसी पहेली के टुकड़े।
जीवाश्म विज्ञान (Palaeontology): मेसोसॉरस (Mesosaurus) नामक छोटे रेंगने वाले जीव के अवशेष केवल दक्षिण अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका में पाए गए। ये जीव विशाल महासागर तैरकर पार नहीं कर सकते थे, जो दर्शाता है कि ये दोनों भूखंड जुड़े थे।
चट्टानों की समानता: ब्राजील के तट और पश्चिमी अफ्रीका की चट्टानों की आयु और संरचना में अद्भुत समानता पाई गई है।
टिलै़ट (Tillite): ये हिमानी निक्षेपण से बनी चट्टानें हैं। भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में एक ही समय के टिलाइट निक्षेप मिलना यह सिद्ध करता है कि ये कभी एक ही ठंडे जलवायु क्षेत्र का हिस्सा थे।
प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits): घाना (अफ्रीका) के तट पर सोने के समृद्ध निक्षेप मिलते हैं, लेकिन वहां सोने की कोई मूल चट्टान नहीं है। वे चट्टानें वास्तव में ब्राजील में पाई जाती हैं।
4. महाद्वीपीय गति के कारण (Force for Drifting)
वेगनार ने महाद्वीपों के खिसकने के लिए दो मुख्य बलों को उत्तरदायी माना:
पोलर फ्लीइंग बल (Polar Fleeing Force): यह पृथ्वी के घूर्णन (Rotation) और उसके उभार से संबंधित है।
ज्वारीय बल (Tidal Force): सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण होने वाला बल।
नोट: बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि ये बल इतने शक्तिशाली नहीं थे कि महाद्वीपों को खिसका सकें। यह वेगनार के सिद्धांत की सबसे बड़ी कमी मानी गई।
5. विस्थापन की प्रक्रिया
वेगनार के अनुसार, विस्थापन दो दिशाओं में हुआ:
उत्तर की ओर (Equatorwards): गुरुत्वाकर्षण और उत्प्लावन बल के कारण। इससे हिमालय और आल्प्स जैसे पर्वतों का निर्माण हुआ।
पश्चिम की ओर (Westwards): ज्वारीय बल के कारण, जिससे उत्तर और दक्षिण अमेरिका का निर्माण हुआ और अटलांटिक महासागर बना।
6. सिद्धांत की आलोचना (Criticism)
वेगनार के सिद्धांत को उस समय के वैज्ञानिकों ने पूरी तरह स्वीकार नहीं किया, क्योंकि:
वेगनार यह स्पष्ट नहीं कर सके कि इतने विशाल भूखंड को खिसकाने के लिए आवश्यक ऊर्जा कहाँ से आई।
उन्होंने ज्वारीय बल को बहुत अधिक शक्तिशाली मान लिया था।
उन्होंने 'सियाल' (SIAL) को 'सिमा' (SIMA) पर तैरता हुआ बताया, जो भौतिकी के नियमों के अनुसार चुनौतीपूर्ण था।
7. सिद्धांत का महत्व और आधुनिक स्थिति
भले ही वेगनार के कुछ तर्क गलत थे, लेकिन उनका "विस्थापन" का विचार बिल्कुल सही था। 1960 के दशक में 'प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत' (Plate Tectonics Theory) के आने के बाद वेगनार के विचारों को वैश्विक मान्यता मिली। आज हम जानते हैं कि महाद्वीप नहीं, बल्कि विवर्तनिक प्लेटें खिसकती हैं, और इसका कारण पृथ्वी के अंदर होने वाली संवहन धाराएं (Convection Currents) हैं।
निष्कर्ष
अल्फ्रेड वेगनार का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत आधुनिक भू-विज्ञान की नींव है। उन्होंने भूगोलवेत्ताओं को यह सोचने पर मजबूर किया कि पृथ्वी स्थिर नहीं, बल्कि एक गतिशील इकाई है।
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