Kishori Mori, Bigari Dehu Banaya | Kripaluji Maharaj Bhajan | Radha Krishna Bhajan | Dainya Madhuri
Автор: Radha Krishna Mandir Cuttack
Загружено: 2020-04-23
Просмотров: 13789
Описание:
Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj Bhajan .
Prem Ras Madira - Dainya Madhuri (pada no. -35)
किशोरी मोरी, बिगरी देहु बनाय |
( हे ब्रजेश्वरी राधिके ! मेरी अनादिकाल की बिगड़ी बना दीजिए।)
अति कोमल सुभाउ माँ तुम्हारो, वेद पुरानन गाय |
( हे माँ राधे ! तुम्हारा हृदय अत्यन्त ही कोमल है, ऐसा वेदों और पुराणों ने बताया है।)
कासों कहूँ सुने को तुम बिनु ? मुझ दुखिया की माय |
(तुमको छोड़कर मैं दुखिया अपना दुःख और किससे कहूँ, यदि कहूँ भी तो उसे पूर्ण करने की सामर्थ्य भी दूसरों में कहाँ है ।)
मोरी दशा भली तुम जानत, कबहूँ न अघन अघाय |
( हमारी अन्तरङ्ग अवस्था को तुम अच्छी तरह जानती हो कि निरन्तर अनन्तानन्त पापों को करते हुए भी, पापों से मेरा पेट नहीं भरता।)
कपटी कुटिल कुपूत रावरो, इत उत ठोकर खाय |
(तुम्हारा ही यह कपटी, दुष्ट कुपुत्र चौरासी-लाख दरवाजों पर ठोकरें खा रहा है। )
भक्ति भाव कछु जानत नाहिं, बनत रसिक-रस-राय |
(माँ राधे! मेरे अन्तःकरण में नवधा-भक्ति के पाचों भावों का लवलेशमात्र भी अंश नहीं है, फिर भी रसिकों का सिरमौर लोकरञ्जन के लिए बनता अवश्य हूँ।)
अपनी ओर निहारी राधिके ! अब तो लेहु अपनाय |
( हे किशोरीजी ! अपनी वात्सल्यमयी दृष्टि के द्वारा, अपनी ओर देखकर, मुझे अब तो सदा के लिये अपना बना लो ।)
मोहन सों इक बार मिला दो, परूँ तिहारे पाय |
(मैं तुम्हारे चरण पकड़कर बार-बार यही मांगता हूँ कि प्यारे श्यामसुन्दर से एक बार अवश्य मिला दो।)
तुम्हरो माय ! कहाय पूत अब, काके द्वारे जाय |
(तुम्हारा पुत्र कहलाकर भी यदि मैं और किसी के द्वार पर जाऊँ तो यह शोभा नहीं देता।)
यह ‘कृपालु’ हठ पुरवहु राधे, न तु सुत मातु लजाय |
( 'कृपालु' कहते हैं कि यह मेरा बाल-हठ अवश्य ही पूर्ण करो, अन्यथा यह पुत्र माता के नाम को कलङ्कित करेगा।)
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: