Shyam Tum Kaise Din Dayal | Kripaluji Maharaj Bhajan | श्याम तुम कैसे दीनदयाल
Автор: Radha Krishna Mandir Cuttack
Загружено: 2020-09-29
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Written and Composed by Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj
Prem Ras Madira - Dainya Madhuri
श्याम तुम कैसे दीनदयाल ।
सब कह तुम बिनु हेतु सनेही, विश्वम्भर प्रतिपाल ।
बेर भई टेरत मोहिं पुनि क्यों, कृपण भये नंदलाल ।
दुक चंदन के तिलक लगाये, कुबरिहि किये निहाल ।
केतिक नाम गिनाऊँ जिन कह, प्रेम दिये गोपाल ।
कारण कौन 'कृपालुहिं त्याग्यो, कारण रहित कृपाल !!
भावार्थ :-
हे श्यामसुन्दर तुमने झूठ-मूठ ही अपना नाम दीन दयालु रख छोड़ा है । सब लोग तुम्हें अकारण-करुण एवं विश्वम्भर कहते हैं । मैं कितनी देर से पुकार रहा हूँ फिर भी तुम नहीं सुनते । क्या अब कृपण हो गये हो ? जरा सा चन्दन लगाने मात्र से तुमने कुब्जा को कृतार्थ कर दिया। कुब्जा ही नहीं अगणित जीवों को इसी प्रकार प्रेमदान किया! 'कृपालु' कहते हैं कि हे अकारण करुण ! फिर क्या कारण है कि मुझे छोड़ रक्खा है ?
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