भक्ति में सबसे बड़ी बाधा क्या है सुनिए सच्चाई | प्रेमानंद जी महाराज सत्संग
Автор: Bhaktibhajan02
Загружено: 2026-03-08
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गुरु, प्रसाद और भगवान की मूर्ति को कैसे देखना चाहिए?
इस गहन सत्संग में प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि आध्यात्मिक मार्ग में कुछ गलत धारणाएँ हमारी भक्ति और प्रगति को रोक देती हैं।
महाराज जी कहते हैं कि गुरु को साधारण मनुष्य, भगवान की मूर्ति को केवल पत्थर या धातु, गुरु मंत्र को सामान्य शब्द, चरणामृत को पानी और प्रसाद को साधारण भोजन समझना बहुत बड़ी भूल है। जब मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा होती है, तब उसमें भगवान का दिव्य स्वरूप स्थापित होता है, और सच्ची श्रद्धा से भगवान का अनुभव किया जा सकता है।
वे यह भी समझाते हैं कि भक्ति में तर्क से अधिक महत्व श्रद्धा और विश्वास का होता है। अगर मन में भक्ति नहीं है, तो भगवान सामने होते हुए भी दिखाई नहीं देते।
प्रसाद और चरणामृत को अत्यंत पवित्र माना गया है। इसी प्रकार संतों और साधुओं के प्रति सम्मान रखना भी आवश्यक है। उनके जाति या बाहरी रूप को देखकर निर्णय करना आध्यात्मिक दृष्टि से गलत माना गया है।
महाराज जी बताते हैं कि यदि मन भगवान की भक्ति में नहीं लगेगा, तो वही मन संसार के भोगों की ओर भागेगा, जिससे दुख, चिंता और भय पैदा होते हैं। इसलिए काम (वासना) और मोह से बचकर भगवान की भक्ति में मन लगाना ही सच्चा सुख और शांति देता है।
इस सत्संग को अंत तक सुनें और भक्ति मार्ग की गहराई को समझें।
राधे राधे 🙏
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