स्वाद की इच्छा कैसे साधना को नष्ट कर देती है | प्रेमानंद जी महाराज सत्संग
Автор: Bhaktibhajan02
Загружено: 2026-03-10
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साधना और नाम जप करने वाले को कैसा भोजन और जीवनशैली अपनानी चाहिए?
इस महत्वपूर्ण सत्संग में श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज बताते हैं कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के लिए सात्विक भोजन, संयमित जीवन और अनुशासन बहुत जरूरी है।
महाराज जी समझाते हैं कि शुद्ध और सीमित भोजन करने से मन शांत रहता है और साधना में स्थिरता आती है। अधिक भोजन और इंद्रियों की तृप्ति भक्ति मार्ग में बाधा बन सकती है। इसलिए भोजन केवल शरीर के पालन के लिए होना चाहिए, न कि स्वाद और भोग के लिए।
वे यह भी बताते हैं कि नियमित और नियंत्रित नींद, ब्रह्ममुहूर्त में जागना, और रोज़ कुछ समय एकांत में भगवान का स्मरण करना साधक के लिए अत्यंत लाभदायक है।
महाराज जी यह भी सावधान करते हैं कि साधना, जप और भक्ति के कार्यों को दिखावा नहीं बनाना चाहिए। सच्ची भक्ति विनम्रता, आत्मसंयम और भगवान के प्रति समर्पण से ही प्राप्त होती है।
यदि मनुष्य अपनी इंद्रियों — विशेषकर जीभ और स्वाद की इच्छा — पर नियंत्रण कर ले, तो आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना आसान हो जाता है।
इस सत्संग को अंत तक सुनें और अपने जीवन में सात्विकता, अनुशासन और भक्ति को अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करें।
राधे राधे 🙏
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