#video
Автор: kabir Das Bhajan
Загружено: 2026-02-02
Просмотров: 11
Описание:
"माया तजी तौ क्या भया" संत कबीर दास जी का अत्यंत गहन और शिक्षाप्रद भजन/दोहा है। इस अमर वाणी में कबीर जी ने माया, मोह और सच्ची साधना का महत्व स्पष्ट किया है। वे कहते हैं कि यदि साधक ने केवल बाहरी रूप से माया का त्याग कर दिया, लेकिन भीतर से उसका मन अभी भी मोह और अहंकार में उलझा है, तो ऐसा त्याग व्यर्थ है।
इस भजन का भाव है – "माया तजी तौ क्या भया" अर्थात यदि केवल बाहरी माया का त्याग किया और भीतर से मन शुद्ध नहीं हुआ, तो उसका कोई लाभ नहीं है। कबीर जी हमें यह सिखाते हैं कि सच्चा त्याग केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होना चाहिए। जब साधक अपने मन को गुरु की शरण और सतनाम में लगाता है, तभी वह माया के बंधन से मुक्त होकर परमात्मा से जुड़ता है।
🌿 भजन/दोहा का आध्यात्मिक संदेश
बाहरी त्याग की निरर्थकता: केवल बाहरी माया का त्याग करने से आत्मा शुद्ध नहीं होती।
आंतरिक शुद्धता का महत्व: मन को मोह और अहंकार से मुक्त करना ही सच्चा त्याग है।
गुरु का मार्गदर्शन: गुरु ही वह शक्ति हैं जो जीव को सही दिशा दिखाते हैं।
भक्ति का सार: नाम‑स्मरण और ध्यान ही आत्मा को शुद्ध करते हैं और परमात्मा से जोड़ते हैं।
जीवन का उद्देश्य: आत्मा को परमात्मा से जोड़ना और भीतर से शुद्ध होना ही साधना का सार है।
🎶 भावनात्मक प्रभाव
यह भजन सुनते समय श्रोता को गहरी आत्मिक जागृति और जीवन के सत्य की अनुभूति होती है। कबीर जी की वाणी हमें यह याद दिलाती है कि केवल बाहरी त्याग से मुक्ति नहीं मिलती, बल्कि भीतर की साधना ही आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है
🌟 निष्कर्ष
"माया तजी तौ क्या भया" केवल एक भजन नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। कबीर जी की वाणी हमें यह सिखाती है कि सच्चा त्याग केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होना चाहिए। गुरु की शरण और नाम‑स्मरण ही वह मार्ग है जो जीव को सच्ची मुक्ति और शांति प्रदान करता है। यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए है जो आत्मिक शांति, भक्ति और सत्य की खोज में है।
👉 kabir @
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: