Project 108 Poems- Poem 35 Sukoon कविता 35
Автор: Anshul Om Matthur
Загружено: 2020-11-20
Просмотров: 45
Описание:
"सुकून ढूँढने में सुकून खो दिया
थक कर राही रुका और रो दिया
ढूंढता रहा जिसे एक उम्र भर
ढूँढने उसे कतरा कतरा खो दिया "
यही तो करते हैं हम सारी उम्र, सुकून ढूंढने की तलाश में सुकून खो देते है। वही सुकून जो हमारे साथ ही खर्च हो रहा होता है।
प्रोजेक्ट 108 की पैंतीसवीं कविता के साथ हम हाज़िर है। सुनिए और बताइए कैसी लगी।
Project 108- Poem 35
Title: Sukoon
प्रोजेक्ट 108- कविता 35
शीर्षक: सुकून
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आपका अपना
+अंशुल माथुर
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