Project 108 Poems - Poem 104 Aasaan Nahi Hai कविता 104 आसान नहीं है
Автор: Anshul Om Matthur
Загружено: 2021-01-28
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“मैं जानता हूं, कलम के, काग़ज़ के
सच्चे क्षत्रिय अभी जीवित होंगे कहीं
और वो आएंगे अपना धर्म बचाने
मिटाने डर इस हथियार का”
कलम का सिपाही होना आसान नहीं है| जब माँ शारदा किसी को कलम का आशीर्वाद देती है तो साथ आती है जिम्मेदारी सच का साथ देने की सच लिखने की| लेकिन कलयुग में ये अपेक्षा रखना मूर्खता है| बिकी हुई इस पत्रकारिता के दौर का आइना दिखाती मेरी आज की कविता|
कैसे? सुनिए आज की इस कविता में|
प्रोजेक्ट 108 की एकसौचारवीं कविता के साथ हम हाज़िर है। सुनिए और बताइए कैसी लगी।
Project 108- Poem 104
Title: Aasaan nahi hai
प्रोजेक्ट 108- कविता 104
शीर्षक: आसान नहीं है
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आपका अपना
+अंशुल माथुर
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