साई ने आचार्य ब्रहस्पति का तोड़ा अहंकार | साईं बाबा की सीख | Best of Saibaba Stories
Автор: Shirdi Sai Baba TV
Загружено: 2025-05-13
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साई के पास मैना का भविष्य देखने वाले आचार्य ब्रहस्पति आते हैं और साई का हाथ देखते हैं और बताते हैं की कल सूर्य ग्रहण के दिन उनका अंतिम दिन होगा। आचार्य ब्रहस्पति की बात सुन कर सभी लोग साई के पास आते हैं। सभी साई के बारे में सोच सोच कर चिंतित होते हैं। अगले दिन साई बाबा सूर्योदय होने पर द्वारिका माई में नहीं मिलते तो सभी को चिंता होने लगती है। सभी साई के जाने की बात सुनकर दुःख हो रहे थे और बायजा का रो रोकर बुरा हाल था तभी साई बायजा के घर भिक्षा माँगने आते हैं। साई के लौटने की बात सुनकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं। साई ब्रहस्पति द्वारा की गयी भविष्यवाणी पर समझाते है की तुम अपने अहंकार में सबको मौत का डर दिखते हो और लोगों का दिल दुखते हो। आचार्य ब्रहस्पति साई से क्षमा माँगता है और कहता है की वो अब किसी के भविष्य में नहीं देखेगा और सिर्फ़ भक्ति करेगा।
मैना के घर एक भूखे प्यासे पति पत्नी और उनकी बेटी आते हैं जिनका नाम जैनी की और माँ का नाम भगीरथि और पिता का नाम दातोबा था। मैना उनकी हालत देख कर उन्हें भोजन कराती है। मैना उन को साई के बारे में बताती है और उनकी कृपा से उस आदमी की बीमारी भी ठीक हो जाएगी मैना उन्हें ऐसा विश्वास देकर शिरडी जाने को कहती है। वो तीनों शिरडी की ओर निकल पड़ते हैं रस्ते में उन्हें कुलकरनी और द्वारिकानाथ मिलते हैं वो साई के बारे में उन्हें ग़लत बाते कहते हैं तो वो सब उनकी बातों में आकर शिरडी जाने से मना कर देते हैं। दातोबा को साई बाबा फ़क़ीर के रूप में दिखते हैं और वो उन्हें कहते हैं की वो शिरडी जाए। लेकिन दातोबा अस्पताल जाने की ठान लेता है। रस्ते में दातोबा का होसला डगमगा जाता है और वो अपनी बीमारी से दुःखी होकर अपने प्राण देने जाता है तो साई उसकी बेटी और पत्नी भागी को नींद से जगा देते हैं। साई बाबा एक फ़क़ीर के रूप में आकर दातोबा को समझाते हैं और अपने परिवार के पास जाने के लिए कहते हैं। दातोबा अपने परिवार के पास लौट जाता है।
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