साई बाबा में आयकर अधिकारी को दिखे भगवान | साईं बाबा की सीख | Best of Saibaba Stories
Автор: Shirdi Sai Baba TV
Загружено: 2025-05-11
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श्याम सुंदर को सेठ विश्वनाथ जी मंदिर में मिलते है और वो उसे अपने आश्रम का काम सम्भालने के लिए नौकरी पर रख लेता है क्योंकि श्याम सुंदर गंगा होने का नाटक कर रहा था इसलिए वो उसे नौकरी दे देते हैं। श्याम सुंदर आश्रम का काम सम्भाल लेता है। श्याम सुंदर के सामने उसकी सास आती है जिसे आश्रम में भर्ती किया जाता है तो श्याम सुंदर उसे देख कर हैरान हो जाता है। श्याम सुंदर की सास से आश्रम के लोग उनके बारे में पूछते हैं तो वो अपने बारे में बताती है की उसके साथ क्या क्या हुआ है। निर्मला की माँ सब कुछ बताती है तो यह सब सुनकर श्याम सुंदर को दुःख होता है।
श्याम सुंदर अपनी पत्नी निर्मला के बारे में सुनकर उसकी चिंता करता है और भगवान से उसकी सुरक्षा की प्रार्थना करता है। व्यापारी की बेटी कंचन के लिए जब वो रिश्ते की बात करते हैं तो वो श्याम सुंदर के साथ शादी करने की बात करती है। निर्मला भी कंचना के घर में काम करने लगती है। राजेंद्र साइकिल को भी विश्वनाथ जी ने ख़रीद लिया था जिसके बारे में सुनकर निर्मला को दुःख पहुँचता है। कंचन श्याम सुंदर को शादी की बात बताती है। श्याम सुंदर और कंचन की शादी होने वाली होती है लेकिन श्याम सुंदर विश्वनाथ और कंचन को बताता है की वो गूंगा भी नहीं है और निर्मला उसकी पत्नी है। कंचना अपने प्रेम को भूल कर दोनों पति पत्नियों को एक साथ मिला देती है। श्याम सुंदर अपनी सास और पत्नी को साथ लेकर शिरडी की ओर चल पड़ता है।
साई बाबा की आरती के बाद सभी शिरडी वासी साई को पैसे देते हैं तो इसे देख कर द्वारिकानाथ साई पर साई को आयकर ने देने के जुर्म में फँसाने की बात कुलकरनी से करता है। द्वारिकानाथ और कुलकरनी आयकर विभाग में जाकर साई के ख़िलाफ़ शिकायत देते हैं और कहते हैं की वो दक्षिणा लेता है और आयकर नहीं भरते हैं। आयकर अधिकारी शिरडी आने की बात करता है और साई से आयकर वसूलने की बात कहता है। कुलकरनी और द्वारिकानाथ बायजा को आयकर विभाग की बात से डराते हैं तो बायजा साई के पास जाती है साई बायजा को समझाते है और बायजा को द्वारिकानाथ पर क्रोध आ जाता है। बायजा कुलकरनी और द्वारिकानाथ को डंडे से मरते हुए धमकती है की अगर उसे दोबारा आयकर की बात पर डराया तो वो उन्हें नहीं छोड़ेगी। आयकर अधिकारी शिरडी में आ जाता है। आयकर अधिकारी साई बाबा की आरती के समय द्वारिकानाथ और कुलकरनी के साथ द्वारिका माई में पहुँच जाते हैं। आयकर अधिकारी को पेट में बहुत दर्द रहता था था जब वो साई आरती में शामिल होता है तो उसका पेट का दर्द ठीक हो जाता है। साई बाबा के पास एक नारायण नाम का आदमी अपनी माँ के साथ मदद माँगने आता है। साई दक्षिणा के पैसों को उठाकर नारायण को दे देते हैं। आयकर अधिकारी जैसे ही द्वारिका माई से बाहर आते हैं उनके पेट का दर्द फिर से बढ़ जाता है। अधिकारी का पेट का दर्द बढ़ता है तो वो द्वारिका माई की ओर भागता है। द्वारिका माई में आते ही उसका दर्द ठीक हो जाता है। नानावली अधिकारी को पकड़ लेता है और उसे साई की तहक़ीक़ात करने की बात पर ग़ुस्सा होता है। द्वारिकानाथ और कुलकरनी आयकर अधिकारी के पास आते हैं और उसे साई के ऊपर कार्यवाही करने को कहते हैं लेकिन वो साई को ग़लत नहीं समझता तभी साई वहाँ भिक्षा माँगने आते हैं और वो साई को भिक्षा देते हैं साई उसका दर्द दूर कर देते हैं। आयकर अधिकारी डाक्टर के पास जाता है तो डाक्टर उसे बताता है की उसका अलसर ठीक हो गया है। आयकर अधिकारी साई के पास आता है और उन्हें धन्यवाद करता है।
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