पर्यावरण संरक्षण पर डिक्टेशन गति-80WPM CSIR STENO
Автор: Shorthand Hub Thakurdwara
Загружено: 2025-06-25
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अध्यक्ष महोदय, पर्यावरण शब्द जितना छोटा है, इसका अर्थ और महत्व उतना ही विशाल है। पर्यावरण केवल हमारे चारों ओर की प्रकृति नहीं है, बल्कि यह वह जीवनदायिनी शक्ति है, जिस पर हम सभी निर्भर हैं। हमारी हवा, पानी, मिट्टी, पेड़- पौधे और जीव-जंतु ये सब मिलकर हमारे पर्यावरण का निर्माण करते हैं। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में प्रकृति को देवी के रूप में पूजा जाता रहा है। हमारे वेद, उपनिषद और पुराणों में पर्यावरण संरक्षण के अनेक सूत्र मिलते हैं। हमने वृक्षों को पूजा, नदियों को माता का दर्जा दिया और पर्वतों को पवित्र माना। यह दर्शाता है कि हमारे पूर्वज पर्यावरण के महत्व को भली-भांति समझते थे। वे जानते थे कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखना मानव जीवन के लिए कितना आवश्यक है। लेकिन, दुर्भाग्यवश, आधुनिकता की दौड़ में हम इस मूलभूत सत्य को कहीं पीछे छोड़ आए हैं। औद्योगीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि ने हमारे पर्यावरण पर भयंकर दबाव डाला है। हमने विकास के नाम पर प्रकृति का अंधाधुंध शोषण किया है। हमारी नदियाँ प्रदूषित हो चुकी हैं, हमारी हवा जहरीली हो गई है, और हमारी धरती बंजर होती जा रही है। वनों की कटाई ने वन्यजीवों के आवास छीन लिए हैं और जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट के रूप में हमारे सामने खड़ा है। जलवायु परिवर्तन केवल एक वैज्ञानिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक कठोर वास्तविकता है, जिसकाअनुभव हम सभी कर रहे हैं। असमय बारिश, बेमौसम गर्मी, भयंकर तूफान और बाढ़ - ये सब इसी के दुष्परिणाम हैं। ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और तटीय इलाकों के डूबने का खतरा बढ़ गया है। यह सब हमें चेतावनी दे रहा है कि अगर हमने अब भी ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सबसे पहले, हमें यह समझना होगा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है। हमें अपनी जीवन शैली में बदलाव लाना होगा। हमें प्लास्टिक का उपयोग कम करना होगा, पानी बचाना होगा, बिजली की खपत कम करनी होगी और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना होगा। छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। शिक्षा और जागरूकता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हमें बच्चों को बचपन से ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। उन्हें पेड़ लगाने, प्रकृति का सम्मान करने और संसाधनों का सदुपयोग करने की शिक्षा देनी होगी। मीडिया और सामाजिक संगठनों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सरकारें भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कठोर पर्यावरणीय कानूनों को लागू करना, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना, वनारोपण अभियान चलाना और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय करना आवश्यक है। हमें स्वच्छ ऊर्जा, जैसे सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। उद्योगों को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्हें पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना चाहिए और अपने अपशिष्ट का उचित प्रबंधन करना चाहिए। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत उन्हें पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं में निवेश करना चाहिए। हमें जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। जल ही जीवन है और इसकी, कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। वर्षा जल संचयन, जल निकायों की सफाई और अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण - ये सभी उपाय आवश्यक हैं। इसके अलावा, हमें जैव विविधता के संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। अनेक प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं, और यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है। हमें वन्यजीवों के आवासों की रक्षा करनी होगी और अवैध शिकार पर रोक लगानी होगी। दोस्तों, यह समय अब केवल बातें करने का नहीं, बल्कि कार्य करने का है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना होगा। हमें उन्हें एक ऐसी धरती सौंपनी है, जहाँ वे स्वच्छ हवा में सांस ले सकें, शुद्ध पानी पी सकें और प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकें। यह तभी संभव है जब हम सभी मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हों। मुझे विश्वास है कि हम सभी मिलकर इस चुनौती का सामना कर सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर एक हरित, स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प लें। यह हमारा साझा घर है, और इसकी देखभाल करना हमारी साझा जिम्मेदारी है। स्वच्छ पर्यावरण। हमारा अस्तित्व सीधे तौर पर हमारे आसपास के वातावरण की शुद्धता से जुड़ा है। बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और दूषित जल स्रोत मानव जाति के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपनी पृथ्वी को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ बनाएं। हमें व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाने होंगे कम प्लास्टिक का उपयोग करें, पेड़ लगाएं और ऊर्जा बचाएं। सरकारें, उद्योग और नागरिक समाज सभी को मिलकर काम करना होगा। एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण ही एक समृद्ध और खुशहाल भविष्य की नींव है। आइए, हम सब मिलकर इस दिशा में सक्रिय प्रयास करें। धन्यवाद । Rafisirtkd
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