रामायण में MAHABALI माल्यवंत कौन थे?
Автор: Renu Yadav
Загружено: 2026-01-13
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रामायण में MAHABALI माल्यवंत कौन थे?
Who was Mahabali Malyavan in the Ramayana?
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माल्यवंत रावण के नानाजी थे, रामायण में महाबली माल्यवंत लंका के उन दुर्लभ पात्रों में गिने जाते हैं, जो केवल शारीरिक बल से नहीं, बल्कि बुद्धि, नीति और धर्म से भी महान थे। वे रावण के वरिष्ठ मंत्री, अनुभवी योद्धा और लंका की राजनीति को गहराई से समझने वाले सलाहकार थे। युद्धकला में निपुण होने के साथ-साथ माल्यवंत शास्त्रों और धर्म का भी गहन ज्ञान रखते थे।
जब लंका का दरबार अहंकार और युद्धोन्माद में डूबा हुआ था, तब माल्यवंत ने अकेले खड़े होकर रावण को सच दिखाने का साहस किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रभु श्रीराम कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं नारायण के अवतार हैं और उनसे वैर लेना लंका के विनाश का कारण बनेगा। यह चेतावनी केवल भय से नहीं, बल्कि गहन विवेक और भविष्यदृष्टि से निकली थी।
माल्यवंत को “महाबली” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे युद्धभूमि में पराक्रमी थे, किंतु उससे भी बड़ा उनका बल सत्य बोलने का साहस था। दुर्भाग्यवश, रावण ने उनकी नीति-पूर्ण सलाह को अनसुना कर दिया। परिणामस्वरूप वही हुआ, जिसकी भविष्यवाणी माल्यवंत ने की थी—लंका का पतन।
माल्यवंत का चरित्र हमें सिखाता है कि वास्तविक बल बाहुबल में नहीं, बल्कि विवेक, धर्म और सत्य के पक्ष में खड़े होने में है।
जय श्री राम 🚩
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