|| Part 4 || Karma philosophy in jainism कर्म की निर्जरा कैसे करें?|| बाह्य तप 6. कायक्लेष
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|| Part 16 || 4~5. एकत्व भावना ~ अन्यत्व भावना ||#jainism #jainpravachan
|| Part 3 ||जीव का कर्मबंध कर्मक्षय और कर्म का उदय कैसे होता है?|| पुण्यकर्म का बंध कैसे करें? ||
मनुष्य पर्याय तक पहुंचना कितना कठिन है जानिए माताजी के मुखारबिन्दु से
Ep68: Jain Darshan: Aatma aur Universe ka Sach | 'Aatma Mein Karmon Ki Nirjara Kaise Hoti Hai?'
भगवान के गुण!| aryika sulakshya mati mataji| #jainism #motivation #jaindharm #love #inspiration #jin
|| Part 5 || अभ्यंतर तप 1.प्रायश्चित 2.विनय 3.वैय्यावच्च 4.स्वाध्याय 5.काउसग्ग 6.ध्यान
🔴विशेष बनने के नुकसान बहुत हैं। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी प्रवचन। Purnmati Mataji Pravachan
चौबीस तीर्थंकर अमृत वाणी I Chaubees Teerthankar Amrit Vaani
|| Part 15 || 4~5. एकत्व भावना ~ अन्यत्व भावना ||
|| Part 1 || Karma philosophy in jainism || प्रदेशोदय कर्मनिर्जरा , विपाकोदय कर्मनिर्जरा ||
|Part 7||जीव का कर्मबंध कर्मक्षय और कर्म का उदय कैसे होता है?औषध पुण्य,शयन पुण्य,मन पुण्य,वचन पुण्य
|| Part 14 || 4~5. एकत्व भावना ~ अन्यत्व भावना ||
|| Part 1 || कर्म के बंध और अनुबंध ||
|| Part 6 ||जीव का कर्मबंध कर्मक्षय और कर्म का उदय कैसे होता है? || स्थान पुण्य ||
पूर्व जन्म की अनुभूति कैसे होती है,उसकी क्या साधना है? भगवान ऋषभ देव कथा (4th)
|| Part 1 || 1. अनित्य भावना ||
जिनने किये धरम उनके फूटे करम - क्या कारण है की धर्मी जीवों को पाप का उदय ज्यादा आता है
|| Part 3 || Karma philosophy in jainism कर्म की निर्जरा कैसे करें?|| बाहय तप 4. रसत्याग 5. संलीनता
Ep63: Samyak Darshan Kya Hai? | Samyak Darshan Ka Meaning | सम्यक दर्शन क्या है? | Jinvani Shorts
किन साधु को नमस्कार किया जाता है kin sadhu ko namaskar Kiya jata hai