🌺 श्री जगन्नाथ जी की आरती 🌺
Автор: lallu-Insaan
Загружено: 2026-01-31
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जय जगन्नाथ स्वामी,
जय बलभद्र बलराम।
सुभद्रा संग विराजे,
नीलाचल धाम॥
नील गगन से न्यारे नयन,
करुणा का सागर।
लकड़ी के रूप में बसते,
भक्तों के अंदर॥
जो भी आया शरण तुम्हारी,
तूने दिया विश्राम।
जय जगन्नाथ स्वामी,
जय बलभद्र बलराम॥
रथ पर बैठे दीनदयाल,
खींचे भक्त हजार।
रस्सी पकड़ जो नाम जपे,
हो जाए भव पार॥
भूखों को अन्न, दुखियों को सुख,
सबका रखे सम्मान।
महाप्रसाद तेरा प्रभु,
कर देता कल्याण॥
ना जाति पूछे, ना कुल देखे,
ना धन का अभिमान।
प्रेम से जो निहारे तुझको,
पाए तेरा स्थान॥
आँसू बन कर बहती भक्ति,
दिल में तेरा नाम।
जय जगन्नाथ स्वामी,
जय बलभद्र बलराम॥
ओड़िया भूमि की शान हो तुम,
भक्ति की पहचान।
भक्त सलबेगा गाए महिमा,
तुम हो सबके प्राण॥
कालीयुग में नाम तुम्हारा,
सबसे बड़ा वरदान।
जगन्नाथ प्रभु की जय हो,
गूंजे सारा जहान॥
जय जगन्नाथ स्वामी,
कर दो जीवन पार।
चरणों में शीश झुकाऊँ,
हे करुणा भंडार॥
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