सूर्य देव चालीसा
Автор: lallu-Insaan
Загружено: 2026-02-09
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दोहा
कनक बदन कुंडल मकर, मुकुट शिरोमणि राज।
रक्त कमल आसन धरे, भानु भये सुरकाज॥
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर।
सहस्रकिरण प्रभु तुम दिनकर॥
जय जगदीश जगत के स्वामी।
देव दानव मानव सब कामी॥
भानु तुम्हारी महिमा भारी।
जाने ऋषि मुनि सब संसारी॥
सप्त अश्व रथ साजे तुम्हारा।
प्रकाशित करता जग सारा॥
अरुण सारथी रथ के आगे।
लेकर प्रभु तुम जग में भागे॥
किरणों से जीवन जग पाता।
अन्न-धन सब तुमसे आता॥
रोग दोष दुख सब मिट जाते।
भक्त तुम्हारे सुख को पाते॥
जो जन प्रातः तुम्हें ध्यावे।
मनवांछित फल वह पावे॥
पूजा करे तुम्हारी जोई।
सुख संपत्ति पावे सब कोई॥
नमन तुम्हें हे जग के दाता।
ज्ञान प्रकाश के तुम विधाता॥
धरती अम्बर तुमसे रोशन।
तुम बिन जीवन होता शोषण॥
करो कृपा प्रभु जग उजियारा।
हरो कष्ट सब संकट सारा॥
दोहा
सूर्य देव चालीसा जो, नित्य पढ़े मन लाय।
दुख दरिद्र भय नाश हो, सुख समृद्धि घर आय॥
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