कुंवारा भीमालपेन कौन थे || History Of Bhimalpen || डोंगरगढ़ का इतिहास || Kunwara bhimsen History
Автор: Koytur Technology
Загружено: 2020-04-07
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कुंवारा भीमालपेन कौन थे || History Of Bhimalpen || डोंगरगढ़ का इतिहास || Kunwara bhimsen History
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*कौन थे ये👉🏻 ""कुंवारा भिवसेन""*(भीमालपेन)
*चलो भिमगढ़. .
कुंवारा भिवसन याने नागपुर्ड़ जिल्हे के पारशिवनी तालुके का महत्वपूर्ण स्थान है जहा संपूर्ण गोन्ड़वाना की श्रद्धा पूर्णभाव से जुडी है . . . .हर साल चैत्र महीने मे यहा सव्वा महीने की जत्रा याने मेला रहने के कारण पूरे गोन्ड़वाना को यह स्थान परिचित है . . . हम इनं भिमालपेन के बारे मे जानना चाहेंगे तिरुमाल शंकरराव मरस्कोल्हे, नागपुर इनकी किताब से. . .
रावण काल के 700 वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश के बालाघाट जिल्हा मोहमभटटा राज्य के राजा सयमाल मडावी इनका राज था. . . . उनके रानी का नाम झमया था. . . उन्हे भुरा भगत नाम का पुत्र था. . ये पुत्र बड़ा ही साहसी था और अकेलेही जंगल मे जाकर खुंखार जानवरो का शिकार करना उनका शौक था. . .एक दिन भुरा भगत बैहर के जंगल मे शिकार करने गये जिसे हम आज काना किसली नाम से जानते है . . . उसी दिन उसी राज्य के राजा ढोला उइका अपनी पुत्री कोतमा के साथ उसी जंगल मे आये थे. . किंतु संजोग से भुरा भगत और कोतमा प्यास बुझाने हेतु पानी की खोज मे एक तालाब के किनारे मिले . . . एक दूसरे को देखकर दोनो मुग्ध हुए . . .और बाद मे इधर उधर की बाते करने लगे . . . संजोग से कोतमा के पिता ढोला उइका वहा पहुचे. . .और उन्होने भुरा भगत को देखा . . . भुरा की सुंदरता देखकर धोला के मन मे अपनी लड़की की शादि की कल्पना जागी . . .उन्होने अपनी लड़की के पास भुरा से शादि की बात रखि . . .विवाह की बाते हुई . . .शादि हुई . . .
कोतमा गर्भार रहि . . .पेट मे बच्चा पल रहा था. . . एक दिन सास झमया को बोलि मुझे जंगल मे जाके कुछ खाने का मन हो रहा है . . .उसी दिन याने चैत्र महीने के पोर्निमा को कोतमा की पेट से एक बच्चे ने जन्म लिया . . . उसका नाम भीमा रखा गया . . .भुरा भगत और कोतमा को पुत्र होने की खुशिया पूरे राज्य मे मनायी गयी. . . .
भीमा को पाछवे सालही शिक्षा हेतु गोटूलमे डाला गया . . . गोटुल के अध्यक्ष याने मुर्सेनाल उस वक्त माहारू उइका थे. . . .वे भीमा के गुरू बने. . .भीमा के बाद भुरा भगत और कोतमा को कुल 11 पुत्र पुत्रिया हुई जिसमे 6 भाइ और 5 बहनो का समावेश था. . . .भीमा के साथ जाटबा, केशबा, हिरबा, भाजी, मुकोशा इन भाइयो और पन्ढरी, पुन्गार, मुगुर, कुशार, और खेरदाई इन बहनो का समावेश था. . . भीमा अलौकिक शक्ति पुरुष थे.
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