सार्वेन (छ: देव ) सगा के गोत्र नाम | गोंडी सुगाथा | gondi | chah dev ke naam | gondi sugatha
Автор: Awachitrao Sayam Gond
Загружено: 2020-08-08
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Описание:
गोंडी पुनेम
कोया पुनेम
गोंडी गोत्र की जाणकारी
प्रकृती प्रदत्त अकुट खजाने का भांडार है गोंडवाना
गोंडवाना का धातु अधातु जितना गुढतत्व रहा रहे उस से कही अधिक उसका सृष्टी कर्ता धर्ता सृजनहार सत्य रहा है
उसका सर्वज्ञ नियंता फडापेन
उसका सल्ला गांगरा
उसका धन ऋण
उसका जनक जननी
उसका जोतीर्मय ज्ञान पुनेम दर्शन
गोंडीयन कोयतुरीयन समाज की जीवन पध्दती जितनी व्यावहारिक तथ्य रही है
उस से कही अधिक वैज्ञानिक तथ्य रही है
उसकी वंशिय दुनिया
उसका गोत्रीय संसार
उसका धृवीय पारी तत्वज्ञान
उसकी संस्कार पध्दती
उस का जय सेवामंत्र
उसका जय जौहाए मंत्र
साथियो जीस सगा समाज में जय सेवा ,जय जौहार का आस्था स्वर अस्तित्व होता है उस भूखंड की दार्शनिक जडे बहुत गहरी होती है .
जय सेवा का अर्थ गोंडी भाषामें
जय = जय (नाम )
जय
मयमाळ
विळाना
सेवा = सेवा ( नाम )
सेवाते
सेवा कियाना
ऐसा होता है .
गोंडी पुनेम नुसार जो गोंडी गोत्र में हमे जो 1से 12 सगादेवों विभाजीत किया हैउस नुसार ही हम नें सम विषम ध्रुवीय पारी नुसार विवाह या शादी करना चाहिये .
सम विषम गोत्र नुसार शादी करोगे तो सुदृढ बलवान निरोगी पिढी को जन्म दोगे
जय सेवा जय गोंडवाना
गोंड
गोंडी संस्कृती
गोंडी धर्म
कोया पुनेम
गोंडी गाथा
गोंडी पुनेम सुगाथा
कोया पुनेम सुगाथा
गोंडी गोत्र
गोत्र प्रतिके
सगापेन सगादेव
धातु - अधातु
गोंडी धर्म ध्वज
प्रिय गोंडी सगा साथियों
सप्रेम जय सेवा
मै ,तिरु. अवचितराव सयाम ,वर्धा (महाराष्ट्र ) मो 9890441417
साथियो गोंड सगा समाज की अनेक जनजातीयां विविध नामों से भारत भर निवास करती है .उन सभी गोंड जन जाती के सगा साथियों के लिये यु ट्युब पर हमनें *अवचितवाणी नामक सिरीज गोंडी धर्म ,कोया पुनेम, गोंडी पुनेम ,गोंडी संस्कृती, गोंडी सुगाथा, कोया पुनेम सुगाथा, गोंडी गाथा के रुप मे उनके जाणकारी मे वृध्दी होणे हेतु शुरु की है .
साथियों *गोंडी धर्म या गोंडी पुनेम एंव कोया पुनेम तथा गोंडवाना के अनेक रहस्यों की जाणकारी हम गोंड लोगों के गोंडी गीतों मे नृत्य एंव संगीतों मे समीटी हुई है
उसे शब्दबध्द करवां कर अनेक महानुभावों ने उसे ग्रंथ के रुप मे सगा समाज को दिया है ,पर शैक्षणिक अभाव या उस से दुरियां होणे से और अज्ञानता की वजहसे या उन्हें किताबों से लगाव नही रहने से गोंड सगाजीवों ने किताबों को नही चुना.
वे अपने नाच गाणे एंव नृत्य गीतों के माध्यमसे ही अपनी गोंडी संस्कृती को ,कोया पुनेम को, गोंडी धर्म को, गोंडी गोत्र को,सगापेन सगावेन सगादेव , गोंडी गोत्र प्रतिकों की अनमोल जाणकारी को अपने समुह में सदियों से सुरक्षीत कर उसमें जीवन जीते गये .
यह अनमोल गोंड सगा समाज की सांस्कृतीक धरोहर हर एक सगा बुध्दीजीवी ,सुशिक्षित अभ्यासु साथियों तक आज कल डिजीटल माध्यम से पहुंचे और गोंड सगा समाज मे सांस्कृतिक,
धार्मिक ,जाणकारी का आदान प्रदान होकर गोंड विवाह सगापारी तथा गोंन्डी संस्कृती के संस्कारों की जाणकारी हो यही आशावों और अपेक्षावों के साथ हम यह अवचितवाणी के द्वारा प्रयास कर रहे है .
इस व्हिडीवों के माध्यम से आप सभी समुह के गोंड सगाजीवों के लिये गोंडी संस्कृती, गोंडी धर्म, गोंडी पुनेम ,कोया धर्म, कोया पुनेम ,गोंडी सगापेन सगादेव ,उनके गोंत्र तथा उनके प्रतिकों तथा गोंडी संस्कृती नुसार सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक ,राजकिय, धार्मिक बातें तथा गढ -किल्ले, पेनकडा, पेनठाणे, गढखुट ,यादी ,पुज्यनिय गोत्र प्रतिके तथा गोंडी धर्म ध्वज ,उनके कलर तथा हमारे शरीर काया मे गोत्र नुसार धातु -अधातु की जाणकारी ,उनके गोंडी नाम ,उनके हिंदी नाम,और अन्य सभी की विस्तृत रुप से जाणकारी उपलब्ध होंगी .
साथियों इस सुनहरी अनमोल संस्कृती की जाणकारी आप को होणे हेतु कृपया इस व्हिडीओ को लाईक करे शेअर करे कॉमेंट करें और सबक्राईब करें .
धन्यवाद
जय सेवा जय गोंडवाना
अवचितराव सयाम
वर्धा (महाराष्ट्र )
मो 9890441417
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