बिहार की जल संपदा: नदियां और तालाब।। Bihargeography ।। BPSC । Ssc । Railway । factsandtheory
Автор: Facts and theory
Загружено: 2026-03-04
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बिहार की जलविज्ञान और प्रमुख जल निकाय: एक संक्षिप्त विवरण
यह दस्तावेज़ बिहार की जल प्रणालियों, प्रमुख नदियों और तालाबों का एक व्यापक विश्लेषण प्रदान करता है। बिहार की जलविज्ञान संरचना मुख्य रूप से भारत-गंगा के मैदानों पर आधारित है, जो कृषि, संस्कृति और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
बिहार की नदी प्रणाली का अवलोकन
बिहार की नदी प्रणाली को 14 प्रमुख बेसिनों में विभाजित किया गया है। गंगा नदी राज्य की मुख्य जलधारा है, जो अन्य सभी नदियों का जल एकत्र करती है।
विभाजन: गंगा नदी बिहार को दो भागों—उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार में विभाजित करती है।
नदियों के स्रोत: उत्तर बिहार की नदियाँ मुख्य रूप से हिमालय से निकलती हैं, जबकि दक्षिण बिहार की नदियाँ छोटानागपुर की पहाड़ियों और मध्य प्रदेश के पठारों से आती हैं।
महत्व: ये नदियाँ सिंचाई, मत्स्य पालन और दैनिक जीवन के लिए आवश्यक हैं, लेकिन मानूसन के दौरान बाढ़ का कारण भी बनती हैं।
प्रमुख नदियों का विवरण
नीचे दी गई तालिका बिहार की प्रमुख नदियों और उनकी विशेषताओं को दर्शाती है:
नदी का नाम उत्पत्ति (स्रोत) बिहार में प्रवेश/संगम मुख्य विशेषताएं
गंगा हिमालय चौसा (बक्सर) में प्रवेश; मनिहारी (कटिहार) से निकास बिहार की जीवन रेखा (445 किमी)। पटना, भागलपुर और मुंगेर इसी के तट पर हैं।
घाघरा मापचाचुंगो हिमनद, तिब्बत छपरा में गंगा से संगम बिहार की दूसरी सबसे लंबी नदी (83 किमी)। इसे 'करनाली' भी कहा जाता है।
गंडक नेपाल हिमालय वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण) समृद्ध जलोढ़ निक्षेप और व्यापक सिंचाई सहायता।
कोसी नेपाल हिमालय भीमनगर में प्रवेश; कुरसेला में संगम "बिहार का शोक" के रूप में प्रसिद्ध; मार्ग बदलने और भारी गाद के लिए कुख्यात।
बागमती नेपाल की पहाड़ियाँ सीतामढ़ी में प्रवेश कोसी नदी में विलीन हो जाती है; सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण।
बूढ़ी गंडक सोमेश्वर की पहाड़ियाँ (नेपाल) उत्तर बिहार के विभिन्न जिले कृषि और मत्स्य पालन के लिए महत्वपूर्ण।
महानंदा दार्जिलिंग की पहाड़ियाँ किशनगंज में प्रवेश पूर्वोत्तर बिहार का मुख्य जल स्रोत।
सोन अमरकंटक पठार (म.प्र.) रोहतास में प्रवेश; पटना के पास संगम समृद्ध खनिज भंडार और उच्च सिंचाई क्षमता।
चंदन देवघर की पहाड़ियाँ (झारखंड) बांका और भागलपुर स्थानीय सिंचाई और छोटी सहायक नदियों का समर्थन।
विशिष्ट अंतर्दृष्टि
घाघरा नदी की विशेषताएं: यह एक बारहमासी और अंतरराष्ट्रीय नदी है। बिहार के गोपालगंज, सिवान और छपरा जिलों में बहते हुए इसके बाढ़ के मैदानों में "चौर" (निम्न भूमि) पाए जाते हैं, जो मानसून के दौरान जलमग्न रहते हैं। इसकी सहायक नदियों में छोटी गंडक, सोंधी नाला और दाहा शामिल हैं।
कोसी का प्रभाव: भारी गाद (सिल्ट) और अपने अस्थिर मार्ग के कारण यह नदी अक्सर विनाशकारी बाढ़ लाती है।
दक्षिण बिहार की नदियाँ: सोन, पुनपुन, किउल-हरोहर, बदुआ और चंदन दक्षिण बिहार की प्रमुख नदियाँ हैं।
बिहार के प्रमुख तालाब
नदियों के अलावा, बिहार में तालाबों का जाल बिछा हुआ है जो जल संचयन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं:
1. मोती झील (मोतिहारी): पूर्वी चंपारण में स्थित, यह पर्यटन और मत्स्य पालन का केंद्र है।
2. गांधी सागर (दरभंगा): एक ऐतिहासिक तालाब, जिसका उपयोग सिंचाई और सांस्कृतिक कार्यों के लिए किया जाता है।
3. कुम्हरार तालाब (पटना): शहरी जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण।
4. पोखर (मधुबनी/मिथिलांचल): मिथिलांचल में पारंपरिक ग्रामीण तालाबों को 'पोखर' कहा जाता है, जो कृषि और दैनिक आवश्यकताओं के लिए जीवन रेखा हैं।
यह जल संरचना बिहार को एक उर्वर भूमि बनाती है, जहाँ नदियाँ और तालाब मिलकर राज्य की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं।
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