Samachaar | Pankaj Jeena | Podcast 09| Radio City | Story | India | Army
Автор: Pankaj Jeena
Загружено: 2021-05-05
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अब आप समाचार सुनिये, अभी अभी ख़बर मिली है, कश्मीर के बारामूला में हमारी भारतीय सेना के 06 जवान शहीद हो गए हैं।
इन सिपाहियों के नाम हैं गगन सिंह, हेम दत्त, नवनीत भट्ट, अनमोल गुप्ता.....
आज से कई साल पहले की एक ख़बर आज भी रमा के कानों में हर दिन सुनाई देती है।
साल 2003,
उसका भाई हेम उससे बिछड़ कर, भारत माँ की गोद में आराम करने लगा था।
परिवार टूट पड़ा था उनका उस वक़्त, माँ को तो कोई होश ही नहीं रहा लेकिन पिताजी भी अपना धैर्य खो चुके थे।
शहीद का परिवार जानता है, कि जो ख़ालीपन उनकी ज़िन्दगी में उनके अपनों के चले जाने पर होता है, वह कभी नहीं भर सकता।हेम बचपन से ही आर्मी में जाना चाहता था।उसकी उम्र के लोग जब इंजीनियर और डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे थे,तब उसके सर पर फ़ौज में जाने का जुनून सवार हो गया था।बारहवीं के बाद NDA की तैयारी करने के लिए उसने दिन रात एक कर दिये थे और आख़िरकार एक दिन उसका सेलेक्शन भारतीय सेना में हो गया।माँ बाबा और रमा ने अपने हाथों से उसकी वर्दी पर सितारे सजाए थे।अगले दिन अख़बार की ख़बर थी,
चाय की दुकान चलाने वाले का बेटा बना सेना में अफ़सर।उस अख़बार की कटिंग को, उन सबने फ़्रेम करा के रख लिया था घर में।
वह साल 2001 था, जब हेम की पहली बार पोस्टिंग बारामुला में हुई थी।अपनी रेजीमेंट के साथ वह दिन रात पेट्रोलिंग में लगे रहते थे।उन दिनों मोबाइल फ़ोन नहीं आये हुए थे।मुहल्ले में एक घर में टेलीफोन लगा हुआ था और हेम का फ़ोन भी उसी घर में आता था।जैसे ही कभी उसके नाम की फ़ोन की घंटी बजती, माँ और रमा दौड़ पड़ते बात करने को।बाउजी तो दुकान में रहते थे इसीलिए उनकी बात कभी कभार ही हो पाती थी।माँ कई कई दिनों तक चिंता में डूबी रहती, जब हेम का फ़ोन नहीं आता था।वह भगवान से प्रार्थना करती और हेम की सलामती की दुआ करती रहती।
पिछले कई दिनों से हेम का फ़ोन नहीं आया था, माँ उससे बात करना चाहती थी लेकिन कैसे करे???
आख़िरकार एक दिन हेम का फ़ोन आया, माँ ने बहुत देर तक बातें की।उस दिन वह बड़े सुकून से बातें कर रहा था माँ से।शायद छुट्टी ली थी उसने।लगभग एक घण्टे बात हुई उस दिन उसकी।उसने माँ को बताया कि अब उसकी रेजीमेंट बारामुला से शिफ़्ट होने वाली है।अब वह छुट्टियों में जल्द ही घर आएगा।
माँ बहुत ख़ुश हुई थी, उस शाम खाने पर, वह बाउजी और रमा को बता रही थी कि उनका बेटा घर आने वाला है।परिवार ख़ुश था क्यूंकि हेम को बारामुला में 03 साल होने वाले थे और उसको अब तक बहुत कम वक़्त मिला था छुट्टियों में घर आने का।
उस दिन बहुत तेज़ बारिश हो रही थी।बाउजी ने दुकान नहीं खोली थी और आज वह घर पर ही थे।शाम का वक़्त था,रमा अपनी गणित की किताब लेकर, कोई सवाल हल करती हुई माँ के सामने बैठी थी।माँ अपने हाथों में ऊन लेकर एक स्वेटर बुन रही थी अपने बेटे हेम के लिए।
पिताजी अख़बार के पन्नो को पलट रहे थे।कमरे में हल्की आवाज़ में रेडियो लगा हुआ था और किसी फ़िल्म के गाने सुनाये जा रहे थे।अचानक शाम के समाचार का वक़्त हुआ और रेडियो में बोल रहे एक समाचार वक़्ता ने ख़बर दी कि हेम अब कभी घर नही आएंगे, वह शहीद हो गए हैं।
पहले तो सबने इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन तभी पड़ोस में रहने वाला रिंकू जिसके घर फोन लगा हुआ था,दौड़ते हुए उनके घर आया और दरवाज़ा खटखटाने लगा, आर्मी हेडक्वार्टर से कॉल था कि हेम शहीद हो चुके हैं।किसी को कोई होश नहीं रहा, कोई सुध नहीं रहा।पिताजी माँ और रमा बेतहाशा रुओ रहे थे, साथ में पूरा मुहल्ला उस शाम आँसुओं से भीग उठा था।
बारिशें बहुत तेज़ बरसी थी शहर में जैसे वह भी शामिल हों, वीर फ़ौजी की शहादत में,
तीन दिन बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ हेम को विदा किया गया।कुछ सालों बाद रमा ने भी अपने भाई की तरह सेना जॉइन कर ली।वह डॉक्टर के रूप में अब तक अपनी सेवाएं दे रही है।ज़िन्दगी अब एक रास्ते में चल रही है लेकिन उनके मन में आज भी वह रेडियो पर आया समाचार सुनाई देता रहता है।
#मुखर
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