मनियारस्यूं बामन || बल मि क्य छौं|| New Garhwali Song Puzzles 1111 || Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
Автор: Jagmora Garhwali Puzzles
Загружено: 2026-03-02
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मनियारस्यूं बामन || बल मि क्य छौं|| New Garhwali Song Puzzles 1111 || Jagmohan Singh Rawat "Jagmora"
बल घाट घाटौ पाणि प्यै
जात्री बल जगरी ह्वाया
अर बाट बाटौ खाणि ख्यै
यात्री बल ढकरी ह्वाया
चंद्रसिंग गढ़वली कण्वाश्रम
थर्प्यैदि भरतपुर दमादम
ढाकरी दुगड्डा बांघाट
उर्यैदि ढकर्वळी धमाधम
बल जब सौ परेख डांडा
तब बल एक चरेख डांडा
त जड़ी बूट्यूं चरख फरख
थर्प्यैनि कै खरेक डांडा
बल चरेख डांडै चुलबुल
नि हैंसदि मालिनी मुळमुळ
बुरांसी बुरांसै खितखित
निखतेंदि बल्ली गंवै तिमुळ
बल तिमळा तिमळा खतेन
अर नांगा नांगा दिखेन
न त बल्ली भरतपुर ह्वाई
नत शकुंतला दुष्यंत दिखेन
बल सत पुली नयारा घाट
नि होंद सतपुली बल हाट
सतपुली नयारा बैं घाट
नि होंद ढकर्वळी बांघाट
ढकरी लाटा एक्की बाट
ह्वैनी ढाका तीन पात
बांघाट बिलखेता बाट
ह्वैनी बेला तीन पात
म्यार घाट पाणी माटो
नि होदू कभी भी घाटो
म्यार घाट पाणी माटो
नि होदू कभी भी घाटो
कल्जीखाला ढकरी बाट
कल्जीखाला ढकरी बाट
मनियारस्यूं बामन क्य छौं?
बोला बोला बल क्य छौं?
शब्दार्थ/भावार्थजगरी- देवताओं के जागर लगाने वाले जागृत मनुष्य जात्री- देवजातरा पे जाने वाले जागृत भक्त पाणि प्यै- पानी पीकर ढकरी- पौराणिक पैदल मार्गों पर चलने वाले व्यापारी चंद्रसिंग गढ़वली (नोट-३) कण्वाश्रम (कोटद्वार के नजदीक चरेख डांडा की तलहटी में मालिनी नदी के तट पर अवस्थित कण्व ऋषि का आश्रम, मालन नदी के तट पर दुष्यंत शकुंतला के प्रेम प्रसंग में भरत जिनके नाम से देश का नाम भारत हुआ, फलीभूत हुये) थर्प्यैदि- स्थापित कर दे भरतपुर (बल्ली गांव, जहां राजा भरत का जन्म हुआ, उसे वीर चंद्रसिंह गढ़वाली ने भरतपुर नाम से स्थापित करना चाहा) दमादम दुगड्डा- पौराणिक ढाकर मंडी बांघाट- दुगड्डा पौड़ी ढाकरी मार्ग का मनियारस्यूं पट्टी के अंतर्गत सतपुली के निकट एक अहम पड़ाव उर्यैदि ढकर्वळी ढाकरियों का उत्सव मेला/मौज-मस्ती, "ढकर्वळी जगमोरा द्वारा एक नवसृजित गढ़वाली शब्द"*) *बल जब सौ परेख (परखे) डांडा (जंगल), तब बल एक चरेख डांडा (कोटद्वार के सामने का एक पर्वत जहां चरख ऋषि का आश्रम है, जहां उन्होंने जड़ी बूटियों के आयुर्वेद से चरक संहिता लिखी), यानी जगमोरा नवसृजित गढ़वाली कहावत अनुसार जड़ी बूटियों के हिसाब से सौ जंगल के बराबर एक चरेख डांडा है चरख फरख- चकाचौंध कै- कई खरेक डांडा- पशुओं के जंगल में मंगल मालिनी- नदी मुळमुळ- मंद मंद हंसना बुरांसी- चरेख डांडा क्षेत्र का एक गांव की बुरांसै (बुरांस फूल) की खितखित (जोर की खिलखिलाहट) निखतेंदि (नहीं बर्बाद होती) बल्ली गंवै (चरेख डांडा क्षेत्र के एक अन्य गांव) के तिमुळ (तिमला/अंजीर फल)बल तिमळा तिमळा खतेन, अर नांगा नांगा दिखेन, कहावत अनुसार अंजीर पेड़ के अंजीर फल गिरकर बर्बाद हुये, और नंगे के नंगे दिखाई दिये, यानी हाथ भी कुछ नहीं आया और उल्टे जगहंसाई अलग हुई , यानी न तो बल्ली भरत के नाम से भरतपुर हुई, और न ही शकुंतला को दुष्यन्त दिखाई दिये। सत पुली (सात पुल्लियां जिनसे सतपुली नाम पड़ा) नयारा (पूर्वी पश्चिमी नयार नदी) सतपुली - हाट (बाजार) बैं घाट (बायें घाट) ढकर्वळी- ढाकरियों की मौज मस्ती/ जंगल में मंगल ढकरी लाटा- पैदल भोले-भाले व्यापारी का एक ही बाट (रास्ता), यानी जगमोरा नवसृजित गढ़वाली कहावत अनुसार सीधा-सीधा इंसान राह नहीं भटकता, वह एक उद्देश्य के साथ अपनी मंजिल की ओर अग्रसर रहता है बांघाट बिलखेत- पौड़ी जिले के कल्जीखाल विकास खंड की मनियारस्यूं पट्टी के अंतर्गत सतपुली के नजदीक ढाकरी के अहम पड़ाव बांघाट के बिलखेत (बेलपत्र के पेड़ों की वजह से बिलखेत नाम पड़ा) बेला (बेलपत्र) के तीन पात। घाटो- नुकसान वह अमुक पौड़ी कल्जीखाल विकास खंड के ढकरी (व्यापारी) बाट (मार्ग) है, *तो बताओ कि तथाकथित पौड़ी जिले की मनियारस्यूं पट्टी का बामन देव बल वह क्या है"?
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