Jodhpur Police का तगड़ा एक्शन, साइक्लोनर टीम का 98वां शिकार बना Virdharam Siyol का राइट हैंड भजनालाल
Автор: Rajasthan Tak
Загружено: 2025-04-13
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जोधपुर रेंज आईजी विकास कुमार की साइक्लोनर टीम ने ऑपरेशन रेड प्रेयरी में बड़ी कार्यवाही करते हुए 50 हजार के इनामी बदमाश और मादक द्रव्य तस्करी के बड़े तस्कर भजनलाल उर्फ भजनालाल पुत्र नारायण राम विश्नोई निवासी बाछला पुलिस थाना धोरीमन्ना को नाथद्वारा से किया गिरफ्तार है। भजनलाल अपने साथी रूपाराम के साथ हमेशा की तरह खेप लाने से पहले सांवलिया सेठ को धोक लगाकर नाथद्वारा में चरण वंदना करने पहुंचा था । साइक्लोनर टीम लगातार उसे ट्रैक कर रही थी। शुक्रवार को नाथद्वारा की कमल होटल में ठहरा था। जहां से दोनों को पकड़ा गया। आईजी ने बताया कि भजनलाल 11 साल से तस्करी कर रहा था। वह सालाना 100 दिन काम कर दो करोड़ रुपए कमाता था। उन्होंने बताया कि यह साइक्लोनर टीम की 98 वीं कार्यवाही है। भजनलाल और बाड़मेर के कुख्यात तस्कर रहे बिरदाराम सियोल के साथ iti की पढ़ाई की थी। बाद भजनलाल ने पेट्रोल पंप पर काम किया, जालसाजी की तो वहां से निकाला तो बदला लेने के लिए पंप पर हमला कर दस लाख लूटे। इसके बाद बिरदाराम का कुशल चालक बना। बाद में बिरदाराम के साथ विश्वासघात कर अपना गैंग बना लिया। कुछ समय पहले बिरदाराम की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। भजनलाल भी एक दुर्घटना में घायल होने के बाद कमजोर हो गया। इस दौरान उसने गैंग के साथी रूपाराम को लीडर बनाने के लिए उसकी ट्रेनिंग शुरू कर दी। लेकिन इससे एक दूसरा साथी नाराज हो गया। उसने साइक्लोनर टीम को सूचना दे दी। उसने विश्वासघात करते हुए भजनलाल और रूपाराम दोनों को हो पकड़ा दिया।
भजनलाल के नाम के लाल से रेड और भजन से प्रेयरी शब्द बना ऑपरेशन की रचना 4 माह पहले की गई। भजनलाल 11 साल से एमपी से तस्करी कर रहा था। पिछले डेढ़ साल से फरार चल रहा था। भजनलाल के खिलाफ विभिन्न राज्यों में 8 मुकदमे दर्ज है। जबकि रूपाराम एमपी, गुजरात और राजस्थान में वांछित चल रहा है। वह इन दिनों एमपी जेल से पेरोल से छुटने के बाद फरार चल रहा था। आईजी ने बताया कि उसे एमपी पुलिस को सुपुर्द किया जाएगा। भजनलाल ने एक दशक में अपना नेटवर्क इतना मजबूत कर लिया कि कोई उसे तोड़ नहीं पा रहा था। एक रात से ज्यादा कहीं नहीं रुका, एक फोन का दुबारा उपयोग नहीं करता। वाहन का दुबारा उपयोग नहीं किया, सेकंड हैंड गाड़ी खरीद का उसके इंजन और चेसिस नंबर मिटा देते एक बार काम में लेकर बाद में छोटे तस्करों को बेच देते। उसे कोई ट्रैक नहीं कर सके इसके लिए चित्तौड़ में भदेसर पहाड़ी पर एक मंदिर में एक अपना कंट्रोल रूम बनाया। जहां पर एक मोबाइल रखा। लेकिन उसमें इंटरनेट नहीं था। गैंग के सदस्य अपनी सूचना उस मोबाइल के ड्राफ्ट बॉक्स में लिख कर चले जाते, दूसरा सदस्य उसका जवाब लिख कर चला जाता। इसी तरीके से तस्करी की प्लानिंग करते। जिसे ट्रैक करना संभव नहीं था।
भजनलाल बिल्कुल प्लानिंग से ही काम करता था। सप्ताह में एक खेप ही डिलीवर करता था। बाकी आराम करता। उसकी एक प्रेमिका भी है। जब दुर्घटना में भजनलाल का कंधा टूट गया तो रूपाराम पर हाथ रख कर उसे लीडर बनाने लगा। इससे उसकी प्रेमिका नाराज हो गई। उसने गैंग के दूसरे साथी से कहा कि तुम काबिल हो, लीडर तुम्हे बनना चाहिए। इसके बाद लीडर बनने की चाह में उसका सिपहसालार बागी हो गया। उसने तय कर लिया कि वह भजनलाल को निपटा देगा और उसने साइक्लोनर टीम को पहाड़ी का पता दे दिया।
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