Vraj Parikrama - 2022 (Day-15) || Chorasi Kos -2022 || Kamavan to Barsana || Hare Krishna
Автор: Vrindavan TV
Загружено: 2022-10-30
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Описание:
आज हम कामवन से बरसाना जायेंगे, ओर जो बीच में भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली है उसका दर्शन करके चलेंगे, आज लगभग हम 15 से 17 km पैदल चलेंगे,
✓कनवाड़ा –
कामां से लगभग 3 कि.मी. पूर्व दिशा में कनवाड़ा गांव है। इस स्थान पर मां यशोदा ने कृष्ण के कानों में छेदन कराया था। इस स्थान पर कण्व मुनि भी कुछ समय रहे थे।
✓कदम्बखण्डी
कनवाड़ा से कदम्बखण्डी 3 कि.मी. और कामी से लगभग 6 कि.मी. पूर्व में है। यहां पर एक कुण्ड है। कुण्ड के तट पर कदम्ब और तमाल के वृक्ष आपस में लिपटे हुए हैं जो कृष्ण राधा के स्वरूप माने जाते हैं। यहां पर की रास-स्थली है। और
✓पाछोल
कदम्बखण्डी के उत्तर में लगभग 200 मीटर की दूरी पर यह गांव है। इसे नागा बाबा का गांव कहते हैं ।
✓सुनहरा
कदम्बखण्डी से लगभग 2 कि.मी. उत्तर में परिक्रमा मार्ग पर यह गांव हैं। यह श्रीमती रंगदेवी और सुदेवी का गांव है। ये राधा रानी की अष्ट सखियों में से से दो हैं। ये दोनों सगी बहनें हैं।
✓चित्रशिला -
ऊंचा गांव से दक्षिण-पश्चिम में चित्रशिला है। यहां एक शिला पर राधारानी के दुपट्टे का निशान है। पहाड़ी के ऊपर गोपियों के पैरों के चिन्ह हैं।
✓ऊंचा गांव / ललिता ग्राम
यह बरसाना से 2 कि.मी. दूर पश्चिमोत्तर दिशा में है। यह ललिता सखी का गांव है।
✓ललिता सखी मन्दिर
इस गांव में पहाड़ी के ऊपर ललिता सखी का मंदिर है। मंदिर में राधा-कृष्ण और ललिता सखी की मूर्तियां हैं। ललिता सखी अष्ट सखियों में से एक हैं। जब राधारानी कृष्ण के विरह में कातर होती हैं तब ललिता सखी राधारानी को शान्त करती
✓दाऊजी
ललिता सखी मन्दिर के पूर्व में पहाड़ी के नीचे दाऊजी का एक प्राचीन मन्दिर है।
✓नारायण भट्ट गोस्वामी समाधि
ऊंचा गांव के किनारे पर दक्षिण में नारायण भट्ट गोस्वामी की समाधि है ये षड्गोस्वामियों जैसे ही थे और इन्होंने इस क्षेत्र में कई मंदिरों का निर्माण करवाया। बरसाना
का श्री लाडली लाल मंदिर इन्होंने बनवाया। इन्होंने व्रज-भक्ति-विलास पुस्तक की रचना की, जिसमें व्रज परिक्रमा का वर्णन है।
✓बरसाना -
नंदगांव से 8 कि.मी. दक्षिण में बरसाना गांव है। यह वृषभानु बाबा का गांव है। बरसाना में राधारानी बड़ी हुईं। उनका लालन पालन हुआ।
This Yatra is 30 days parikrama, we have to walk and go at all places where Krishna was walk and give us Love and Happiness. The 84 'Kos Parikrama' is a nearly 300-km-long pilgrimage route that devotees take around 30 days to cover bare-footed to pay obeisance at vital places linked with Lord Krishna
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