Vraj Parikrama - 2022 (Day-16) || Chorasi Kos -2022 || Barsana Parikrama || Hare Krishna
Автор: Vrindavan TV
Загружено: 2022-10-31
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Описание:
बरसाना परिक्रमा
वृषभानु कुण्ड
यह कुण्ड बरसाना गांव के पूर्व भाग में है। यह वृषभानु बाबा का कुण्ड है।
सांकरी खोर
चिकसौली गांव के पूर्व भाग में सांकरी खोर है। यह दो पहाड़ियों के मध्य एक संकीर्ण मार्ग है जो ब्रह्म पर्वत पर्वत को अलग करता है। यहां कृष्ण गोपियों से दूध-दही का दान मांगते थे।
चिकसौली \
चिकसौली चित्रा सखी का गांव है। यह सांकरी खोर और गहवर कुण्ड के मध्य में है।
कृष्णकुण्ड
चिकसौली गांव के पश्चिमोत्तर भाग में कृष्ण कुण्ड है। यह पहाड़ियों के बीच गहवर वन में स्थित है। इसे गहवर कुण्ड भी कहा जाता 1
मानगढ़ -
गहवर वन के पश्चिम में मानगढ़ है। इस गढ़ के ऊपर मानमंदिर है। यहां राधारानी ने मान किया था।
मोर कुटी / मयूर कुटी
यह गहवर वन के पूर्व में पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। यहां पर कृष्ण और मयूर में नृत्य प्रतियोगिता
हुई थी। यहां पर एक मंदिर है। मंदिर में एक चित्र है। इस चित्र को एक दृष्टिहीन महात्मा ने बनाया था।
दान-बिहारी मन्दिर -
कुशल बिहारी जयपुर मन्दिर के दक्षिण पश्चिम में पहाड़ी के ऊपर दान बिहारी मन्दिर है।
कुशल-बिहारी जयपुर मन्दिर - -
यह मंदिर लाडली लाल मंदिर के दक्षिण भाग में पहाड़ी के ऊपर है। यह राजस्थान के राजा द्वारा बनाया गया था। यह विशाल मन्दिर है।
लाडली लाल मन्दिर
यह बरसाना का मुख्य मन्दिर है। इसमें लाडली लाल की मूर्तियां हैं। प्यार से श्रीमती राधारानी को लाडली और कृष्ण को लाल कहा जाता है।
विलास गढ़
यह ब्रह्मगिरि के चार शिखरों में से एक है। यहां राधा और कृष्ण की कई लीलायें हुई हैं।
पीली पोखर
पीली पोखर बरसाना के उत्तर में स्थित एक सुंदर जलाशय है। माता यशोदा राधारानी से बहुत प्रेम करती थीं और चाहती थीं कि कृष्ण का विवाह राधारानी से हो एक बार राधा रानी नन्दग्राम आयीं यशोदा मैया ने उसके हाथों पर हल्दी का लेप लगा दिया। प्रथा के अनुसार मंगनी का सूचक था। जब राधा रानी अपने पीले हाथों को देखी तो वे लजा गयीं और अपने हाथ इस तालाब के जल में धोयीं। इसी से इसका जल पीला हो गया और इसका नाम पीली पोखर पड़ गया।
किशोरी कुंज
पीली पोखर के निकट पश्चिमोत्तर दिशा में किशोरी कुंज आश्रम है। भजन परायण साधु यहां निवास करते हैं। सन्तलोग प्रतिदिन यहां पर भजन कीर्तन एवं आरती करते हैं।
This Yatra is 30 days parikrama, we have to walk and go at all places where Krishna was walk and give us Love and Happiness. The 84 'Kos Parikrama' is a nearly 300-km-long pilgrimage route that devotees take around 30 days to cover bare-footed to pay obeisance at vital places linked with Lord Krishna
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