अपने मन को अहंकार से हटाकर सुमिरन में लगा दो फिर देखों चमत्कार! Sri Divya premanand ji mharaj 🙏🦚💯
Автор: Divya Premanand Katha
Загружено: 2026-02-01
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प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा शत्रु उसका अहंकार है। जब तक मन अहंकार से भरा रहता है, तब तक न तो ईश्वर की कृपा पूरी तरह उतरती है और न ही जीवन में सच्चा सुख मिलता है। अहंकार हमें यह भ्रम देता है कि “सब कुछ मैं ही कर रहा हूँ”, जबकि वास्तव में हर श्वास, हर सफलता, हर अवसर प्रभु की देन है।
महाराज जी कहते हैं—अपने मन को इस अहंकार से हटाकर सुमिरन में लगा दो। सुमिरन केवल नाम जप नहीं है, बल्कि मन को प्रभु की याद में स्थिर करना है। जब मन बार-बार भटकता है, तब भी धैर्य मत छोड़ो। धीरे-धीरे मन पवित्र होने लगता है, विचार बदलने लगते हैं और भीतर एक अद्भुत शांति प्रकट होती है।
प्रेमानंद जी बताते हैं कि सुमिरन करने वाले को बाहर से कुछ अलग करने की जरूरत नहीं पड़ती। प्रभु स्वयं उसके जीवन की व्यवस्था करने लगते हैं। जो काम वर्षों से अटके होते हैं, वे अपने आप बनने लगते हैं। मन का बोझ हल्का हो जाता है, भय दूर हो जाता है और विश्वास बढ़ता है।
महाराज जी कहते हैं—जब अहंकार घटता है और सुमिरन बढ़ता है, तभी चमत्कार होता है। यह चमत्कार कोई दिखावा नहीं, बल्कि भीतर का परिवर्तन है, जो पूरे जीवन को बदल देता है।
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