उदास मन को सुकून देने वाली बातें!Sri Hari Divya premanand ji mharaj 🙏🦚🎯
Автор: Divya Premanand Katha
Загружено: 2026-02-05
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प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि उदासी मन की स्वाभाविक अवस्था है, लेकिन उसमें टिके रहना आवश्यक नहीं। मन जब दुखी होता है, तब वह बीते हुए कल या आने वाले कल में उलझा रहता है। महाराज समझाते हैं कि सुकून वर्तमान में है, क्योंकि प्रभु भी इसी क्षण में विराजमान हैं। जैसे ही मन को वर्तमान में लाओगे, उदासी अपने आप हल्की होने लगेगी।
वे कहते हैं कि मन को जब प्रेम और भक्ति का सहारा मिल जाता है, तब उसे बाहरी सहारे की आवश्यकता नहीं रहती। संसार से अपेक्षा रखने पर मन टूटता है, लेकिन प्रभु से जुड़ने पर मन भर जाता है। यदि मन बहुत उदास हो, तो बस इतना करो—प्रभु का नाम लो, बिना किसी मांग के। नाम अपने आप मन की गांठें खोल देता है।
महाराज यह भी कहते हैं कि दुख यह सिखाने आता है कि हम गलत जगह सुख खोज रहे थे। जब तक हम परिस्थितियों को दोष देते रहेंगे, मन अशांत रहेगा। लेकिन जिस दिन स्वीकार करना सीख लोगे, उसी दिन सुकून उतर आएगा। स्वीकार में बड़ी शक्ति है।
उनके अनुसार, उदास मन को सबसे ज्यादा आवश्यकता है करुणा की, और वह करुणा पहले खुद के लिए होनी चाहिए। अपने आप को कमजोर मत समझो, क्योंकि प्रभु ने किसी को भी व्यर्थ नहीं बनाया। बस भरोसा रखो—यह समय भी गुजर जाएगा, और मन फिर से मुस्कुराना सीख जाएगा।
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