राम का अंगद को दूत बनाकर भेजना। अंगद रावण संवाद | Ramayan Katha
Автор: Bharat Ki Amar Kahaniyan
Загружено: 2026-03-13
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श्री राम जी रावण को समझाने के लिए अपने वीर अंगद को भेजते हैं और उसे कहने के लिए कहते हैं की यदि वह उनकी बात मान ले तो लंका का अहित नहीं होगा और लंका की प्रजा और रावण के कुल का विनाश नहीं होगा। अंगद जी अकेले ही लंका में जाते हैं और रावण के सामने पहुँच कर श्री राम का संदेश सुनाने के लिए पूछते हैं। रावण अंगद के सामने श्री राम का अपमान करता है और अंगद को बैठने के लिए आसन भी नहीं देता।अंगद रावण को कहता है की मैं लंका के अहित को नहीं होने दे सकता और अपने प्रभु श्री राम का भी अपमान सहन नहीं कर सकता इसलिए अंगद पहले अपनी पूँछ से अपने लिए रावण से ऊँचा आसन बना लेते हैं और उसे श्री राम का संदेश सुनते हैं। अंगद के समझाने के बाद भी रावण श्री राम की धर्म पत्नी को वापस नहीं लौटाने के लिए मानता है तो अंगद रावण को उसकी मृत्यु का समीप है। अंगद रावण को श्री राम के पराक्रम और बाल के बारे में बताता है तो रावण श्री राम का अपमान करने लगता है और उनकी वानर सेना को तुच्छ कह कर उनका भी अपमान करता है। इस बात पर अंगाड रावण को चुनौती देता है की जो मेरा पैर ज़मीन से उठा देगा तो मैं श्री राम से स्वयं पीछे हटने के लिए कह दूँगा और यदि कोई भी ऐसा नहीं कर पाया तो तुम्हें अपनी हर माननी होगी अंगद का पैर ज़मीन से उठाने के लिए सभा में उपस्थित राक्षस नहीं उठा पाते तो रावण आगे आता है।
भारत की अमर कहानियाँ में आपको मिलती हैं ऐसी कथाएँ जो न केवल अनोखी हैं, बल्कि हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी हैं। ये कहानियाँ शाश्वत हैं क्योंकि ये हमारे मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं।
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