Aho Hari ! Tum Mama Sahukar | Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj Bhajan | ft.Shivani RKM
Автор: Radha Krishna Mandir Cuttack
Загружено: 2020-10-04
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Written and Composed by Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj
Prem Ras Madira-Dainya Madhuri
अहो हरि! तुम मम साहूकार ।
तुम्हरे ऋणहि उऋण नहिं होइ सक, अगनित जनम मझार ।
करि करुणा करुणा-वरुणालय, नर-तनु दिय सरकार ।
पुनि निज वेदन-मार्ग बतायो, कोनों मम उपकार ।
पुनि समुझायहु संत अनंतन, ल पुनि-पुनि अवतार |
कह 'कृपालु' मन तबहुँ सुन्यो नहि, तुम ही सुनहु पुकार ॥
भावार्थ-
हे श्यामसुन्दर ! तुम मेरे साहूकार हो और मैं तुम्हारा कर्जदार हूँ। तुम्हारे अकारण उपकारों के ऋण से मैं अनन्त जन्मों में भी उ ऋण नहीं हो सकता । हे करुणा-वरुणालय ! तुमने अकारणकरुणा के ही परिणाम-स्वरूप मनुष्य शरीर दिया, फिर स्वयं वेदों को प्रकट करके अपनी प्राप्ति का मार्ग-दर्शन किया, फिर अनन्तानन्त संतों को अवतार दिला कर मुझे बार-बार जगाया। "कृपालु" कहते हैं तब भी इस नीच मन ने मेरी नहीं सुनी। हे श्यामसुन्दर ! अब तुम्हीं हमारी पुकार सुनकर हमें अपना लो।
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