SEM 4 MIC PRCTICAL बिंदुकित विधि (Dot Method) वर्णमात्रि विधि (Choropleth Method)
Автор: Dept. of Geo MLSM COL
Загружено: 2026-01-04
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यहाँ भूगोल के प्रायोगिक (Practical Geography) के अंतर्गत जनसंख्या के वितरण को प्रदर्शित करने की बिंदुकित विधि (Dot Method) का संक्षिप्त व परीक्षा–उपयोगी विवरण दिया जा रहा है — परिभाषा, विशेषताएँ, उपयोग तथा 2 प्रश्न सहित:
🔴 बिंदुकित विधि (Dot Method)
📌 परिभाषा
बिंदुकित विधि वह मानचित्रण विधि है, जिसमें किसी क्षेत्र की कुल जनसंख्या या अन्य मात्रात्मक आँकड़ों को निश्चित मान वाले छोटे–छोटे बिंदुओं (Dots) द्वारा मानचित्र पर प्रदर्शित किया जाता है।
प्रत्येक बिंदु जनसंख्या की एक निश्चित संख्या (जैसे 1 बिंदु = 1,000 व्यक्ति) को दर्शाता है।
➡️ बिंदुओं का फैलाव और सघनता उस क्षेत्र में जनसंख्या के वितरण और घनत्व को स्पष्ट करता है।
📌 बिंदुकित विधि की विशेषताएँ
सरल एवं प्रभावी विधि – इसे समझना और बनाना आसान होता है।
वास्तविक वितरण का आभास – जनसंख्या के फैलाव का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करती है।
घनत्व का स्पष्ट संकेत – अधिक बिंदु = अधिक जनसंख्या, कम बिंदु = कम जनसंख्या।
लचीली विधि – विभिन्न मान (1 बिंदु = 100, 1000, 10,000) लिए जा सकते हैं।
छोटे क्षेत्र के अध्ययन में उपयोगी – जिला, राज्य या नदी घाटी आदि।
📌 बिंदुकित विधि के उपयोग
जनसंख्या वितरण को दर्शाने के लिए
पशुधन वितरण (गाय, भैंस, भेड़ आदि)
कृषि उत्पादन (गेहूँ, चावल, कपास)
खनिज संसाधनों का वितरण
औद्योगिक इकाइयों या श्रमिकों का वितरण
प्रश्न 1
बिंदुकित विधि से आप क्या समझते हैं? जनसंख्या वितरण को दर्शाने में इसकी उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 2
बिंदुकित विधि की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए तथा इसके दो उपयोग बताइए।
भारत की 2011 की जनगणना के आधार पर राज्यवार जनसंख्या के वितरण को बिंदुकित विधि (Dot Method) द्वारा भारत के रूपरेखा मानचित्र पर प्रदर्शित कीजिए।
निम्न निर्देशों का पालन कीजिए—
1 बिंदु = 10 लाख व्यक्ति का मान ग्रहण करें।
मानचित्र पर शीर्षक, संकेत कुंजी (Key), दिशा संकेत (North Line) तथा मानचित्र मानक अवश्य दर्शाएँ।
जनसंख्या के अधिक, मध्यम एवं कम वितरण वाले राज्यों को बिंदुओं की सघनता द्वारा स्पष्ट करें।
🟩 वर्णमात्रि विधि (Choropleth Method)
📌 परिभाषा
वर्णमात्रि विधि वह मानचित्रण विधि है, जिसमें प्रशासनिक इकाइयों (जैसे राज्य, जिला, देश) में किसी सांख्यिकीय आँकड़े को विभिन्न रंगों या रंगों की गहराई (हल्का–गाढ़ा) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
➡️ सामान्यतः प्रतिशत, घनत्व, अनुपात या दर (Rate) जैसे आँकड़ों को दिखाने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण:
जनसंख्या घनत्व
साक्षरता दर
वर्षा वितरण
📌 वर्णमात्रि विधि की विशेषताएँ
रंगों पर आधारित विधि – आँकड़ों को अलग–अलग रंगों या रंगों की तीव्रता से दर्शाया जाता है।
क्षेत्रीय तुलना में सहायक – विभिन्न राज्यों/जिलों की तुलना आसानी से की जा सकती है।
दर (Rate) आधारित आँकड़ों के लिए उपयुक्त – जैसे प्रति वर्ग किमी जनसंख्या।
स्पष्ट एवं आकर्षक प्रस्तुति – मानचित्र देखने में सरल और प्रभावी होता है।
संकेत कुंजी (Legend) अनिवार्य – बिना कुंजी के मानचित्र अधूरा माना जाता है।
📌 वर्णमात्रि विधि के उपयोग
जनसंख्या घनत्व का वितरण दिखाने में
साक्षरता दर के अध्ययन में
वर्षा एवं तापमान का क्षेत्रीय वितरण
कृषि घनत्व या भूमि उपयोग
आर्थिक आँकड़े – जैसे प्रति व्यक्ति आय
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