मन के चक्कर में मत फसना, वरना माया में उलझकर रह जाओगे।(महत्वपूर्ण सत्संग) premanand ji mharaj 🙏🔱🦚🎯
Автор: Divya Premanand Katha
Загружено: 2026-01-20
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प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मन के चक्कर में पड़ना ही जीव का सबसे बड़ा बंधन है। मन कभी शांति नहीं चाहता, वह हमेशा भोग, इच्छा और कल्पनाओं में उलझाए रखता है। आज जो अच्छा लगता है, कल वही मन दुख का कारण बन जाता है। महाराज समझाते हैं कि मन माया का द्वार है, और जो व्यक्ति मन की हर बात मानने लगता है, वह धीरे-धीरे माया के जाल में फँस जाता है। फिर उसे सत्य और असत्य का भेद समझ में नहीं आता।
मन कहता है – अभी सुख भोग लो, भक्ति बाद में कर लेना, लेकिन यही “बाद में” पूरे जीवन को नष्ट कर देता है। इसलिए संत कहते हैं कि मन का गुलाम मत बनो, बल्कि मन को अपना सेवक बनाओ। जब मन को नाम-स्मरण, सत्संग और सेवा में लगाया जाता है, तब वही मन शुद्ध हो जाता है। जो मन से ऊपर उठ गया, वही माया से पार हो गया और उसी को सच्ची शांति प्राप्त होती है।
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