भगवद गीता अध्याय 11 | विश्वरूप दर्शन योग | विराट रूप का अद्भुत दर्शन || Dharma Decode
Автор: Dharma Decode
Загружено: 2025-09-13
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भगवद गीता अध्याय 11 | विश्वरूप दर्शन योग वह अद्भुत क्षण है जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को अपना विराट स्वरूप दिखाया। यह अध्याय हमें यह सिखाता है कि भगवान केवल एक व्यक्ति या एक रूप तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड के आधार हैं।
अर्जुन जब संशय और द्वंद्व में डूबा हुआ था, तब उसने कृष्ण से कहा – “हे प्रभु, मैं आपके असली स्वरूप को देखना चाहता हूँ।” तब भगवान ने अर्जुन को दिव्य दृष्टि दी और अपने विश्वरूप का दर्शन कराया। अर्जुन ने देखा कि असंख्य मुख, असंख्य नेत्र, असंख्य भुजाएँ और असंख्य देव रूप कृष्ण के भीतर समाए हुए हैं। मानो हजार सूर्यों का प्रकाश एक साथ आकाश में प्रकट हो गया हो।
इस विराट रूप में अर्जुन ने सृष्टि का आरंभ भी देखा और संहार भी। उसने देखा कि समस्त योद्धा, महापुरुष, भीष्म, द्रोण, कर्ण तक भगवान के मुख में प्रवेश कर रहे हैं। तब कृष्ण ने कहा – “अर्जुन, मैं काल हूँ, जगत का संहार करने आया हूँ। जिनका नाश होना है, वे पहले ही मेरे द्वारा नष्ट किए जा चुके हैं। तू केवल निमित्त मात्र है। तेरा कार्य केवल कर्तव्य निभाना है।”
यह अध्याय हमें सिखाता है कि –
भगवान सर्वव्यापी हैं, वे ही सृष्टि के रचयिता और संहारकर्ता हैं।
जीवन में परिणाम हमारे हाथ में नहीं, केवल कर्म हमारे हाथ में है।
भक्ति ही भगवान को पाने का सबसे सरल और सच्चा मार्ग है।
भगवान को वस्तु की कीमत नहीं, भाव चाहिए। एक पत्ता, एक फूल, एक फल या थोड़ा सा जल भी यदि प्रेमपूर्वक अर्पित किया जाए तो वे स्वीकार करते हैं।
सच्चा भक्त वही है जो अहंकार छोड़कर, प्रेम और करुणा के साथ जीवन जीता है।
इस विराट दर्शन के बाद अर्जुन ने अपने सारे अहंकार और संशय छोड़ दिए और भगवान की शरण में आ गया। उसने समझ लिया कि जब भगवान स्वयं सारथी हैं, तो हार का कोई भय नहीं। यही संदेश हमारे जीवन के लिए भी है – जब हम अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देते हैं, तो भय, चिंता और मोह सब समाप्त हो जाते हैं।
अगर तुम भी जीवन में कठिनाइयों से जूझ रहे हो, अगर तुम्हें लगता है कि रास्ता अंधकारमय है, तो इस अध्याय का यह संदेश याद रखना –
“हे साधक, तू केवल अपना कर्तव्य कर, बाकी सब मुझे समर्पित कर। मैं तेरा रक्षक हूँ।”
यह अध्याय न केवल आध्यात्मिक गहराई को प्रकट करता है, बल्कि हमें जीवन जीने की सच्ची प्रेरणा भी देता है। भक्ति, नम्रता और समर्पण – यही इस अध्याय का सार है।
✨ इस वीडियो में आपको मिलेगा –
अर्जुन और कृष्ण का संवाद
विश्वरूप का दिव्य वर्णन
काल रूपी भगवान का संदेश
भक्ति और शरणागति की महिमा
जीवन जीने की व्यावहारिक सीख
यह वीडियो आपके मन और आत्मा को शांति देगा और जीवन के संघर्षों को देखने का नया दृष्टिकोण देगा।
🙏 अगर आप भी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेम करते हैं और गीता के उपदेशों को अपने जीवन में उतारना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक ध्यान से सुनें।
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