*नाम दीक्षा का अधिकार: एक विस्तृत चर्चा !*Part-
Автор: Bhakti me Shakti
Загружено: 2026-02-27
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Ram bhakti @bhaktimeshakti2281
नाम दीक्षा का अधिकार :एक विस्तृत चर्चा !
Part-1
एक व्यक्ति ने घर बनाया तो बिजली का connection apply हुआ !उसके घर की तार को poll/खम्बे की तार से जोड़ दिया गया लेकिन बिजली फिर भी आई नहीं !जांच हुई तो पता चला कि खम्बे की जिस तार से घर की तार को जोड़ा गया है वह आगे transformer से जुड़ी नहीं हुई !जिस तार में transformer का करंट ही नहीं दौड़ रहा वह भला आगे किसी और तार को कैसे light दे सकती है ?
ठीक इसी तरह जिसे नाम दीक्षा का अधिकार ही नहीं जो स्वयं ही प्रकाशित नहीं वह दूसरो को भला क्या प्रकाश दे सकता है ?जो खुद ही खुदा से जुडा हुआ नही मात्र जुड़ने का स्वांग रचता है वह भला दूसरो को खुदा से क्या जोडेगा ?
संत महात्माओ का जीवन साधकजनो खुली किताब हुआ करता है वे अपने जीवनाचरण से जनमानस को सिखाते हैं न कि मात्र प्रवचनो से !
वह भला कहा का संत जो खुद की रक्षा के लिये तो armed protection/अंगरक्षक रखता है और मंच से बोलता है कि भगवान रक्षा करते है !
जो खुद तो शानो-शौकत से विलासी जीवन जीता है अपने लिए भव्य आयोजन करता करवाता है और अनुयाइयों को उतने पैर पसारिये जितनी लंबी चादर का अर्थात मितव्ययता का उपदेश देता है वह भला कहा का संत ?
जो दूसरो का मुफ़्त का दिया ले-लेकर दूसरो का दिया खा-खाकर स्वयं ही जन्म जन्मांतरो का कर्जवान बन चुका है वह भला दूसरो को क्या कर्जमुक्त करवायेगा ?गंभीरता से सोचना बनता है !
टमाटर भी जब खरीदते हैं साधकजनो तो घुमा-घुमाकर देखते हैं लेकिन गुरु धारण करते समय मति मारी जाती है भीड़ का अनुसरण करते है !
जिसे अपना सर्वस्व सौप देते हैं या सौपने चले हैं उसका जीवन चरित्र भला क्या पढ़ते है ?उसके बारे में क्या सारी जानकारी/मालूमात हासिल करते हैं ?
धर्म के नाम पर भोले भाले लोगो की श्रद्धा/विश्वास के साथ कैसे ठगी की जाती है यह बात किसी से छुपी नहीं !
लेकिन कहा जाता है सुबह का भूला अगर शाम को वापिस आ जाए तो वह भूला नहीं कहलाता !
धन्यवाद
राम राम
नाम दीक्षा का अधिकार: एक विस्तृत चर्चा !
Part-2
पिछले 5-7 दिनों में अलग-अलग शहरो के 2 साधकजनो ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त की !
पीड़ा यह कि नाम दीक्षा लिये काफी अरसा हो चला लेकिन अभी भी मन व्यथित है क्लान्त है अशांत है !
पूछने पर पता चला कि जहां से इन्होने नाम दीक्षा ग्रहण की हुई है उनको तो नाम दीक्षा देने का अधिकार ही नहीं है !
साधकजनों स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने अपनी वसीयत में 5 सुगढ़ साधक-साधिकाओं को नाम दीक्षा का अधिकार दिया था !
जिनमे 3 मातृशक्ति थी :
माता कर्म देवी जी
माता लक्ष्मी देवी जी
और श्री मति शकुन्तला देवी जी (पानीपत) !
दो महानुभाव थे :
श्री हरिवंश शास्त्री जी (लुधियाना)
और परम पूज्य श्री प्रेम जी महाराज !
इन पांच लोगो में से भी आगे नाम दीक्षा देने का अधिकारी/उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार केवल और केवल पूज्य प्रेम जी महाराज को था !
अर्थात पूज्य सत्यानंद जी महाराज ने 5 लोग नाम दीक्षा देने के लिए तय किये उनमें से चार आगे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं कर सकते थे केवल प्रेम जी महाराज को अधिकार दिया गया कि आगे आप अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर सकते हैं और कालान्तर में पूज्य विश्वमित्र जी महाराज पूज्य प्रेम जी महाराज के उत्तराधिकारी हुए !
पूज्य विश्वामित्र जी महाराज शरीर में थे तब भी उनके अनुसार 15 लोग बिना अधिकार के नाम दीक्षा दे रहे थे अभी तो संख्या और भी बढ़ चुकी है !
भोले भाले लोगो को फंसाया जाता है उनकी श्रद्धा और भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता है !
सत्य ईश्वरोलोके भव: अर्थात जगत में सत्य ही ईश्वर है ;सत्य को न तो झुठलाया जा सकता है न ही नकारा जा सकता है !
नाम दीक्षा के अधिकार पर पूज्य श्री विश्वमित्र जी महाराज की video अवश्य देखे सुने !
महाराज video के अंत में भोले भाले लोगों को जो कि अनाधिकारियो के यहां फंसे हुए हैं उनको मुख्य धारा में जोड़ने के प्रयास करने का अनुरोध कर रहे है !
तो सभी से विनम्र आग्रह है कि महाराज के अनुरोध को सेवा मानकर निभाये और सभी को सच्चाई से अवश्य अवगत करवाये !*नाम दीक्षा का अधिकार: एक विस्तृत चर्चा !*
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