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03. आतम काज सँवारिये.. पण्डित द्यानतरायजी कृत भजन

Автор: Sudeep Shastri

Загружено: 2025-03-04

Просмотров: 3217

Описание: .
यह भजन पण्डित द्यानतरायजी कृत है |


हम आभारी है श्री कुंद-कुंद कहान पारमार्थिक ट्रस्ट मुंबई, कहान आर्ट म्यूजियम जिनके द्वारा कृत चित्रों का हमने प्रयोग किया है |

आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
तुम तो चतुर सुजान हो, क्यों करत अलोलैं।
आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
सुख दुख आपद सम्पदा, ये कर्म झकोलैं ।
तुम तो रूप अनूप हो, चैतन्य अमोलैं ।
आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
तन धनादि अपने कहो, यह नहिं तुम तोलैं ।
तुम राजा तिहुँ लोकके, ये जात निठोलैं
आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
चेत-चेत ‘द्यानत’ अबै, इमि सद्गुरु बोलैं ।
आतम निज पर-पर लखौ, अरु बात ढकोलैं
आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं


पण्डित द्यानतराय आगरा के निवासी थे। इनका जन्म अग्रवाल जाति के गोयल गोत्र में हुआ था। इनके पूर्वज लालपुर के मूल निवासी थे। द्यानतरायजी के पिता का नाम श्यामदास था। कविवर द्यानतराय जी का जन्म विक्रम संवत 1733 में हुआ। द्यानतरायजी आगरा में मानसिंह जी की स्वाध्याय सभा का लाभ लेते थे। वहीं से इन्हें जैन तत्वज्ञान की रुचि हुई, बाद में कवि को पंडित बिहारी दास जी के धर्म उपदेश से जैन धर्म के प्रति अगाध श्रद्धा उत्पन्न हुई। द्यानतरायजी ने अनेक रचनाएं की। इनका संकलन स्वयं कवि ने धर्म विलास के नाम से संवत 1780 में किया है। इन्हें निम्न प्रकार से विभक्त किया जा सकता है।
1. पद
2. पूजा, भक्ति, स्तोत्र
3. रूपक काव्य
4. प्रकीर्णक काव्य
कवि की रचनाओं में अनेक प्रकार के आध्यात्मिक भजन, दोहा, सवैया, आदि छंद मिलते हैं। इनके भजन और पूजायें आज भी समाज में प्रचलित हैं। कवि ने कुल 333 पद, अनेक पूजाएं एवं 45 विषयों पर कविताएं लिखी हैं। इनमें आश्वासन, तत्व बोध, उपदेश शतक, व्यवहार पच्चीसी, पूर्ण पंचाशिका, दान बावली आदि अनेक रचनाएं संग्रहित हैं।

#jainbhajan #adhyatmik #jainchannel

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03. आतम काज सँवारिये.. पण्डित द्यानतरायजी कृत भजन

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