ईश्वर और जीव का संबंध क्या? शरीर और कर्मों के विभाजन क्यों? || आचार्य प्रशांत, तत्वबोध पर (2019)
Автор: शास्त्रज्ञान
Загружено: 2024-01-23
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⚡ आचार्य प्रशांत कौन हैं?
अध्यात्म की दृष्टि कहेगी कि आचार्य प्रशांत वेदांत मर्मज्ञ हैं, जिन्होंने जनसामान्य में भगवद्गीता, उपनिषदों ऋषियों की बोधवाणी को पुनर्जीवित किया है। उनकी वाणी में आकाश मुखरित होता है।
और सर्वसामान्य की दृष्टि कहेगी कि आचार्य प्रशांत प्रकृति और पशुओं की रक्षा हेतु सक्रिय, युवाओं में प्रकाश तथा ऊर्जा के संचारक, तथा प्रत्येक जीव की भौतिक स्वतंत्रता व आत्यंतिक मुक्ति के लिए संघर्षरत एक ज़मीनी संघर्षकर्ता हैं।
संक्षेप में कहें तो,
आचार्य प्रशांत उस बिंदु का नाम हैं जहाँ धरती आकाश से मिलती है!
आइ.आइ.टी. दिल्ली एवं आइ.आइ.एम अहमदाबाद से शिक्षाप्राप्त आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं।
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वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 25.02.2019, ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत
प्रसंग:
अविद्योपाधिः सन् आत्मा जीव इत्युच्यते।
मायोपाधिः सन् ईश्वर इत्युच्यते।
तस्मात्कारणान्न जीवेश्वरयोर्भेदबुद्धिः स्वीकार्या। ~ तत्वबोध
भावार्थः
अविद्या उपाधि से युक्त आत्मा को जीव कहते हैं।
माया उपाधि से युक्त आत्मा को ईश्वर कहते हैं।
इसलिए जीव-ईश्वर में भेदबुद्धि को स्वीकार नहीं करना चाहिए।
~ ईश्वर और जीव का क्या संबंध है?
~ शरीर और कर्मों के इतने विभाजन क्यों हैं?
~ 'जीव-ईश्वर में भेदबुद्धि को स्वीकार नहीं करना चाहिए' से क्या आशय है?
संगीत: मिलिंद दाते
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