चाणूर और मुष्टिक ने क्यों ललकारा भगवान कृष्ण को ! कृष्ण लीला कथा !
Автор: Brajwasi Satsang Marg
Загружено: 2026-03-05
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चाणूर और मुष्टिक ने क्यों ललकारा भगवान कृष्ण को ! कृष्ण लीला कथा !
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कंस का भय: कंस को अपनी मृत्यु के अपशकुन (जैसे दर्पण में प्रतिबिंब न दिखना) दिखाई देने लगते हैं, जिससे वह अत्यंत भयभीत हो जाता है
कुवलयापीड हाथी का उद्धार: रंगभूमि के द्वार पर कंस ने कुवलयापीड हाथी को कृष्ण को मारने के लिए खड़ा किया था। भगवान कृष्ण ने खेल-खेल में ही उसका दांत उखाड़कर उसे और उसके महावत को यमलोक पहुँचा दिया ।
रंगभूमि में प्रवेश: जब कृष्ण और बलराम ने अखाड़े में प्रवेश किया, तो अलग-अलग लोगों ने उन्हें अलग-अलग भावों से देखा—पहलवानों को वे वज्र के समान, स्त्रियों को साक्षात कामदेव और कंस को काल के रूप में दिखाई दिए ।
चाणूर और मुष्टिक का उद्धार: अंत में, कृष्ण ने चाणूर को और बलराम जी ने मुष्टिक पहलवान को युद्ध में पछाड़कर उनका उद्धार किया ।
पहलवानों का उद्धार: भगवान कृष्ण ने चाणूर को और बलराम जी ने मुष्टिक, कूट, शल और तोशल जैसे महाबली पहलवानों को खेल-खेल में मार गिराया ।
कंस का अंत: जब कंस ने क्रोध में आकर कृष्ण के माता-पिता को मारने और नंद बाबा को कैद करने का आदेश दिया, तब कृष्ण ने छलांग लगाकर उसके सिंहासन पर चढ़कर उसे नीचे गिरा दिया और उसका वध कर दिया ।
सारूप्य मोक्ष: कंस को 'सारूप्य मोक्ष' मिला क्योंकि वह निरंतर भयवश ही सही, लेकिन भगवान कृष्ण का ही चिंतन करता था ।
माता-पिता से मिलन और गुरुकुल शिक्षा
जेल से मुक्ति: कृष्ण और बलराम ने देवकी और वसुदेव की बेड़ियाँ काटीं। पहले तो माता-पिता उन्हें साक्षात भगवान मानकर संकोच में थे, लेकिन योगमाया के प्रभाव से वे पुनः पुत्र स्नेह में बंध गए ।
नंद बाबा की विदाई: कृष्ण ने नंद बाबा को समझाकर ब्रज विदा किया और वचन दिया कि वे मिलने आएँगे ।
सांदीपनी मुनि का गुरुकुल: कृष्ण और बलराम शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन (अवंती पुरी) गए। उन्होंने केवल 64 दिनों में 64 विद्याएँ सीख लीं ।
गुरु दक्षिणा: गुरु दक्षिणा के रूप में कृष्ण ने यमराज के पास जाकर गुरु के मृत पुत्र को वापस लाकर उन्हें सौंपा ।
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