वारी जाऊँ रे बलिहारी जाऊं रे ।। Vaaree jaau re balhari jaau re kabir bhajan 🙏🙏🙏
Автор: कबीर वाणी
Загружено: 2026-02-02
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सतगुरु आवत देखिया, ओर जाझम दीनी बिछाय।
फूलन की बिरखा भई, वहाँ रही चमेली छाय।।
वारी जाऊँ रे बलिहारी जाऊं रे।।2।।
म्हारा सतगुरु आँगण आया मैं वारी जाऊ रे।।
1. सतगुरु आगण आया मैं गंगा गोमती न्हाया।।2।।
म्हारी निरमल हो गई काया मैं वारी जाऊँ रे।।
वारी जाऊँ रे बलिहारी जाऊं रे।
म्हारा सतगुरु आँगण आया मैं वारी जाऊ रे।।
2. सतगुरु दर्शन दीना म्हारा भाग्य उदय कर दीना।।2।।
म्हारा धरम भरम सब छीना मैं वारी जाऊँ रे।।
वारी जाऊँ रे बलिहारी जाऊं रे।
म्हारा सतगुरु आँगण आया मैं वारी जाऊ रे।।
3. सत्संग बण गई भारी मंगलाचार उचारी ।।2।।
म्हारी खुली हिरदय की ताली मैं वारी जाऊँ रे।
वारी जाऊँ रे बलिहारी जाऊं रे।
म्हारा सतगुरु आँगण आया मैं वारी जाऊ रे।।
4. दास नारायण जस गायो, चरणों में शीश नमायो।।2।। म्हारा सतगुरु पार उतारे मैं वारी जाऊँ रे।
वारी जाऊँ रे बलिहारी जाऊं रे।
म्हारा सतगुरु आँगण आया मैं वारी जाऊ रे।।2।।
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