उत्तर बिहार के मैदानों का भौगोलिक विभाजन।। नदियों द्वारा निर्मित भू आकृति।। Bihargeography।।
Автор: Facts and theory
Загружено: 2026-02-28
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उत्तर बिहार के मैदानों का भौगोलिक विभाजन: एक विस्तृत ब्रीफिंग दस्तावेज़
कार्यकारी सारांश
यह दस्तावेज़ उत्तर बिहार के मैदानों के भौगोलिक और जल विज्ञान संबंधी विभाजन का एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, उत्तर बिहार का मैदान मुख्य रूप से अपनी जल निकासी प्रणाली (Drainage System) और क्षेत्रीय विविधताओं के आधार पर विभाजित है। इस क्षेत्र को छह प्रमुख मैदानी क्षेत्रों में बांटा गया है: महानंदा, कोसी, कमला, बागमती, गंडक और घाघरा मैदान।
प्रमुख निष्कर्षों से पता चलता है कि यह क्षेत्र नदियों के बदलते मार्गों, अवसादों के जमाव और विशिष्ट स्थलाकृतियों जैसे 'चौर', 'दियारा' और दलदली भूमि द्वारा परिभाषित है। कोसी और घाघरा जैसी नदियों की स्थानांतरण प्रकृति इस क्षेत्र को अत्यधिक बाढ़ प्रवण बनाती है, जो इसकी भौगोलिक संरचना को निरंतर आकार देती रहती है।
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1. महानंदा मैदान (Mahananda Plain)
महानंदा मैदान उत्तर बिहार के सबसे पूर्वी भाग का प्रतिनिधित्व करता है। इसका निर्माण मुख्य रूप से महानंदा नदी द्वारा लाए गए अवसादों से हुआ है।
भौगोलिक सीमाएँ: इसके उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में गंगा नदी और पश्चिम में कोसी नदी स्थित है।
प्रमुख विशेषताएँ:
इसकी ऊपरी सतह पर दलदली भूमि और नदी किनारे की भूमि पाई जाती है।
यहाँ पुरानी अवसादित मिट्टी का आधिक्य है।
महानंदा और कोसी नदियाँ भारी मात्रा में रेत और गिट्टी (कंकर) का वहन करती हैं, जिससे कुछ क्षेत्र ऊंचे हो जाते हैं और कम अवसाद वाले क्षेत्र निम्न-भूमि बन जाते हैं।
ढलान और विस्तार: इस मैदान की ढलान उत्तर से दक्षिण की ओर है। यह उत्तर बिहार के कुल मैदानी क्षेत्र का लगभग 1/10 भाग कवर करता है।
2. कोसी मैदान (Kosi Plain)
कोसी मैदान अपनी अस्थिर प्रकृति और राज्य के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
क्षेत्रीय विस्तार: यह बिहार के सुपौल, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा और मधेपुरा जिलों में फैला हुआ है।
स्थानांतरण प्रकृति: कोसी नदी अपने मार्ग बदलने के लिए कुख्यात है। यह ऐतिहासिक रूप से पूर्व से पश्चिम की ओर स्थानांतरित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप पूरा मैदान भी पश्चिम की ओर खिसक गया है।
भौगोलिक सीमाएँ: उत्तर में नेपाल, पूर्व में महानंदा मैदान, दक्षिण में गंगा और पश्चिम में कमला नदी।
ढलान और विस्तार: इसकी ढलान उत्तर से दक्षिण की ओर है और यह उत्तर बिहार के मैदान का लगभग 1/6 हिस्सा कवर करता है।
3. मध्यवर्ती मैदान: कमला और बागमती
ये मैदान उत्तर बिहार के केंद्रीय भाग का निर्माण करते हैं और यहाँ 'चौर' (Chaur) जैसी संरचनाएँ प्रमुखता से पाई जाती हैं।
कमला मैदान (Kamala Plain)
स्थान: यह बागमती और कोसी मैदानों के बीच स्थित है।
ढलान: इसकी ढलान उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है।
विशेषता: कमला नदी के मार्ग बदलने के कारण इस क्षेत्र में कई 'चौर' का निर्माण हुआ है।
बागमती मैदान (Bagmati Plain)
कवर किए गए जिले: सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और शिवहर।
सहायक नदियाँ: लाल बकैया, लखंडेई और अधवारा।
विशिष्टता: इस मैदान में छोड़े गए नदी मार्गों (Abandoned river paths) और असमान बालू/मिट्टी के जमाव के कारण कई दलदली भूमि और मेढ़र पाए जाते हैं।
4. गंडक और घाघरा मैदान (पश्चिमी क्षेत्र)
ये मैदान उत्तर बिहार के सबसे पश्चिमी हिस्से का निर्माण करते हैं और अपनी विशिष्ट भू-आकृतियों के लिए जाने जाते हैं।
गंडक मैदान (Gandak Plain)
प्रवेश और संगम: गंडक नदी वाल्मीकि नगर (पश्चिम चंपारण) से प्रवेश करती है और हाजीपुर के पास गंगा में मिलती है।
भू-आकृति: नदियों के बदलते मार्ग के कारण यहाँ विस्तृत निम्न-भूमि है जो लंबे अर्ध-गोलाकार कुर्सी जैसी दिखाई देती है।
ढलान: उत्तर में उत्तर से दक्षिण की ओर, जबकि दक्षिण में यह दक्षिण-पूर्व की ओर झुक जाती है।
घाघरा मैदान (Ghaghara Plain)
अन्य नाम: इसे 'घाघरा-गंडक दोआब' या 'सरवन मैदान' के नाम से भी जाना जाता है।
शामिल जिले: सीवान, गोपालगंज और सारण।
प्रमुख भौगोलिक विशेषताएँ:
दियारा भूमि: नदी के भीतर की भूमि।
चौर: विस्तृत निम्न-भूमि क्षेत्र।
Levees: ऊंचे तटबंध।
यह नदी अपने परिवर्तनों की संख्या और विविधता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।
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5. भौगोलिक विशेषताओं का तुलनात्मक विवरण
मैदान का नाम प्रमुख जिले/सीमा ढलान की दिशा मुख्य विशेषता
महानंदा पूर्वी भाग (नेपाल/WB सीमा) उत्तर से दक्षिण दलदली भूमि, 1/10 क्षेत्र
कोसी सुपौल, सहरसा, मधेपुरा उत्तर से दक्षिण मार्ग परिवर्तन, सर्वाधिक बाढ़, 1/6 क्षेत्र
कमला केंद्रीय भाग उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व चौर का निर्माण
बागमती सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व छोड़े गए नदी मार्ग, सहायक नदियाँ
गंडक पश्चिम चंपारण से हाजीपुर उ: उ-द, द: द-पू अर्ध-गोलाकार निम्न-भूमि
घाघरा सीवान, गोपालगंज, सारण पश्चिमी सीमा दियारा भूमि, ऊंचे तटबंध (Levees)
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निष्कर्ष
स्रोत संदर्भ के अनुसार, उत्तर बिहार का मैदान एक गतिशील भौगोलिक इकाई है। इसकी संरचना यहाँ की नदियों की प्रवाह दिशा और उनके द्वारा किए जाने वाले अवसादों के जमाव से सीधे प्रभावित होती है। कोसी और घाघरा जैसी नदियों की विसर्पी प्रकृति और मार्ग बदलने की प्रवृत्ति ने यहाँ एक ऐसी स्थलाकृति को जन्म दिया है जो दलदल, चौर और दियारा भूमि जैसी विविधताओं से परिपूर्ण है।
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