Sufi bhajan:Agar hai shok milne ka: सूफी संत मंसूर का भजन: S.S. Ratnu
Автор: Surendra Singh Ratnu's Bhajan channel
Загружено: 2024-05-25
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A sufi bhajan by sufi saint Mansoor and sung by S.S. Ratnu.
संत मंसूर 890से 902 तक भारत में रहे।तब वो सनातन धर्म के संपर्क में आयेऔर उन्हौने कई सूफी भजन लिखे
अगर है शौक मिलने का तो हरदम लौ लगाता जा
जलाकर खुद नुमाई को भस्म तन पर लगाता जा
पकड़ कर इश्क की झाड़ू सफा कर हिजरिये दिल को
दुई की धूल को लेकर मुसल्लह पर उड़ाता जा
मुसल्लह फाड़ तस्बिह तोड़ किताबें डाल पानी में
पकड़ तू दस्त फरिश्तों का गुलाम उनका कहाता जा
न मर भूकों न रख रोजा न जा मस्जिद ना कर सिजदा
वजू का तोड़ दे कूजा शराबे शौक पीता जा
हमेशा खा हमेशा पी न गफलत से रहो इकदम
नशे में सैर कर अपनी खुदी को तू जलाता जा
ना हो मुल्ला ना हो ब्राह्मण दुई की छोड़कर पूजा
हुक्म है शाह कलंदर का अनलहक तू कहाता जा
कहे मंसूर मस्ताना मैंने हक दिल में पहचाना
वही मस्तों का मयखाना उसी के बीच आता जा
Повторяем попытку...
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