महाशिवरात्रि व्रत की अद्भुत कथा ! शिव पार्वती विवाह ! ध्यान से सुनें !
Автор: Premanand Rasik Vani★
Загружено: 2026-02-14
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आज की वीडियो में हम सुनेंगे:-
माता सती का हठ और देह त्याग ।
विमानों का दृश्य: एक बार सती जी ने आकाश मार्ग से देवताओं को सज-धज कर जाते देखा। पता चला कि उनके पिता दक्ष के घर महायज्ञ है। सती ने शिव जी से वहां चलने की ज़िद की।
शिव जी की चेतावनी:
शिव जी ने समझाया कि "बिना बुलाए गुरु और माता-पिता के घर जा सकते हैं, लेकिन यदि वहां विरोध और अपमान हो, तो नहीं जाना चाहिए। अपमान मृत्यु से भी कष्टकारी होता है।"
सती का जाना: सती नहीं मानीं और नंदी व अन्य गणों के साथ चली गईं। वहां दक्ष ने उनका घोर अपमान किया और शिव जी के लिए यज्ञ में कोई भाग नहीं रखा।
देह त्याग: अपने पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने योग अग्नि प्रकट की और अपना शरीर भस्म कर लिया।
4. वीरभद्र का तांडव और यज्ञ विध्वंस
वीरभद्र की उत्पत्ति: सती की मृत्यु का समाचार सुनकर शिव जी ने क्रोध में अपनी जटा उखाड़कर जमीन पर पटकी, जिससे महाकाय वीरभद्र प्रकट हुए।
दण्ड: वीरभद्र और शिव गणों ने यज्ञ विध्वंस कर दिया:
भृगु ऋषि की दाढ़ी नोच ली (क्योंकि वे मूंछों पर ताव देकर हंसे थे)।
पूषा देवता के दांत तोड़ दिए (क्योंकि वे बत्तीसी दिखाकर हंसे थे)।
दक्ष का सिर काट दिया गया (बाद में बकरे का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया गया ताकि यज्ञ पूरा हो सके)।
5. पार्वती जन्म और कठोर तपस्या
सती का जन्म हिमालय के घर पार्वती के रूप में हुआ। नारद जी के उपदेश से उन्होंने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की।
सप्तऋषियों की परीक्षा: शिव जी ने सप्तऋषियों को पार्वती की परीक्षा लेने भेजा। ऋषियों ने शिव जी की बहुत बुराई की (कि वे अमंगल हैं, सांप पहनते हैं, कोई घर नहीं है) और कहा कि विष्णु जी से विवाह कर लो।
पार्वती का निश्चय: पार्वती जी ने कहा, "चाहे शिव जी में करोड़ों अवगुण हों, मेरे गुरु ने जो कहा है मैं वही करूंगी। अगर शिव नहीं मिले तो मैं करोड़ों जन्मों तक कुंवारी रहूंगी।"
6. शिव जी की अनोखी बारात
विवाह तय होने पर शिव जी की बारात निकली। यह अब तक की सबसे विचित्र बारात थी:
दूल्हा: शिव जी बैल पर सवार, भस्म लगाए हुए, गले में सांप और बाघ की खाल पहने हुए।
बाराती: भूत, प्रेत, पिशाच, चुड़ैलें। किसी का सिर नहीं, किसी का सिर ही सिर है, कोई बहुत मोटा, कोई कंकाल जैसा।
स्वागत: जब बारात हिमाचल नगरी पहुंची, तो सुंदर दूल्हे की उम्मीद में बैठी स्त्रियां और बच्चे भूत-प्रेतों को देखकर डरकर भाग गए।
मैना का विलाप: पार्वती की माँ मैना ने जब शिव का यह रूप देखा, तो उन्होंने सिर पीट लिया और कहा, "मैं अपनी बेटी को लेकर पहाड़ से कूद जाऊंगी या समुद्र में डूब जाऊंगी, लेकिन इस पागल से शादी नहीं करूंगी।"
7. सुंदर रूप और विवाह (पाणिग्रहण)
देवताओं और नारद जी ने मैना को समझाया। फिर भगवान शिव ने अपना 'चंद्रशेखर स्वरूप' धारण किया। यह रूप इतना सुंदर था कि करोड़ों कामदेव भी लजा जाएं।
सुंदर रूप देखकर सभी मोहित हो गए।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिव और पार्वती का विवाह (पाणिग्रहण) संपन्न हुआ।
कथा का समापन इस संदेश के साथ होता है कि शिव-पार्वती का विवाह जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है और अहंकार के नाश का प्रतीक है।
वीडियो का मुख्य संदेश:
ईश्वर प्रेम और विश्वास के भूखे हैं, बाहरी दिखावे के नहीं। पार्वती जी का अटूट विश्वास ही उन्हें शिव जी तक ले गया।
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