आदमी… | बदलते चेहरे और सच्चाई पर एक ग़ज़ल
Автор: GHAZAL KA SAFAR
Загружено: 2026-02-16
Просмотров: 36
Описание:
यह ग़ज़ल “आदमी” की फितरत पर है —
चेहरों के पीछे छिपे सच पर।
“आदमी को आदमी से डर लगने लगा है,
अब आईने में भी खुद से नज़रें चुराने लगा है।”
वक्त के साथ सब कुछ बदला,
मगर इंसानियत कहीं पीछे छूट गई।
अगर यह कलाम आपको सोचने पर मजबूर करे
तो वीडियो को लाइक और शेयर ज़रूर करें।
अपनी राय कमेंट में लिखें।
#आदमी #इंसानियत #समाजपरशायरी #हिंदीग़ज़ल #सच्चाई #कड़वीसच्चाई #सोचनेपरमजबूर #हिंदीशायरी #HeartTouching #SocialPoetry
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: