@kajalsharma11
Автор: kajalsharma11
Загружено: 2021-11-13
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Описание:
Kajal Sharma is an eminent Kathak artist and outstanding exponent of Kathak, a powerful and imaginative artist who displays breath-taking technique in both pure dance and abhinaya. She has been part of Kathak fraternity for the last 50 years .She is a disciple of Padma Vibushan Pandit Birju Maharaj ji.
Kajal ji is a recipient of numerous awards including the State Award by the UP Sangeet Natak Academy Lucknow. She has toured extensively and performed across various countries and has held the post of lecturer of the Performing Arts at Dayal Bagh University Agra for 9 years before moving to UK
विदुषी काजल शर्मा: भारत की सांस्कृतिक राजदूत।
अनूठे प्रेम के अमर प्रतीक ताजमहल के शहर आगरा में एक मध्यम वर्गीय सुशिक्षित परिवार में आज से 60 वर्ष पूर्व जन्मी काजल शर्मा को उनके परिवार वाले तो उच्च शिक्षा के बाद किसी और क्षेत्र में भेजना चाहते थे, लेकिन विधाता सांस्कृतिक राजदूत के रूप में अलग अलग देशों में उनके माध्यम से भारतीय नृत्य कला की धवल कीर्ति पताका फहराना चाहता था, तभी तो नन्ही काजल के अबोध मन में उसने नृत्य का बीजारोपण कर दिया था... आज भारतीय कथक नृत्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान हैं.... विदुषी काजल शर्मा जी।
काजल की नैसर्गिक प्रतिभा स्वतः ही आगे बढ़ी... वह किसी माली के खाद और खुरपी की आश्रित न होकर किसी छोटे से गमले में नही अपितु उपवन में प्रकृति प्रदत्त जलवायु से प्राकृतिक रूप में पुष्पित पल्लवित होती रही और अपने मनमोहक सुगंध से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही।
मात्र 3 वर्ष की अल्पायु में अगर मे मंचित दुष्यंत शकुंतला नाटक में भरत की भूमिका निभाकर रातोंरात चर्चित हो जानेवाली तिखे नैन नक्श वाली गोल मटोल सुंदर काजल 6, 7, वर्ष की उम्र में नृत्य प्रदर्शन के लिए आसपास के शहरों से बाकायदा आमंत्रित की जाने लगी थीं। तब ये लोकप्रिय फिल्मी गीतों पर नृत्य करती थीं।
लखनऊ में आयोजित एक ऐसे ही कार्यक्रम में पंडित लच्छू महाराज ने 6 वर्षीय काजल का नृत्य.... बिंदिया चमकेगी... .. गाने पर देखकर उनकी मां को अगले दिन मिलने के लिए बुलाया और कथक सिखाने की सलाह देते हुए स्वेच्छा से... धतक थुंगा सिखा भी दिया।
चूंकि बेबी काजल की मां उनकी उच्च शिक्षा को लेकर प्रतिबद्ध थीं इसलिए काजल पढ़ाई और नृत्य... दोनो ही नावों की सवारी सफलता पूर्वक कर रही थीं.... दोनों की ही परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर रही थीं। आगरा के ही गुरू बाबूलाल श्रीवास्तव से उन्होंने नृत्य सीखना शुरू कर दिया था, बीच बीच में गुरु लच्छू महाराज का भी मार्गदर्शन इन्हें मिलता रहा। और, फिर भारत सरकार से छात्रवृति प्राप्त कर इन्होंने पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज जी के मार्ग दर्शन मे कथक नृत्य के आकाश में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया। काजल शर्मा का नृत्य... हर बार.. हर कोण और दृष्टिकोण से दर्शनीय होता है। इनकी कमनीय काया कब मथुरा वृंदावन की संकरी गलियों से गुजरती हुई, नवाब वाजिद अली शाह के रंगमहल से होती हुई... अजंता एलोरा के प्रस्तर शिल्पों में परिवर्तित हो जाती है, हम अपलक देखते ही रह जाते हैं। इनका नाम लेते ही मन मस्तिष्क घुंघरुओं की झनकार से झंकृत हो उठता है, अति द्रुत लय के तत्कारों, तेज तैयार तोड़े, टुकड़े और परनो की प्रस्तुति में कभी हिरणी सी चपलता, कभी शेर वाली छलांग, कभी तितलियों सी रंग बिरंगी छटाएं, आकर्षक भ्रमरी और सम्मोहक अभिनय का एक ही नाम है... काजल शर्मा।
आगरा के दयालबाग विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक कथक नृत्य का प्राध्यापन कर चुकीं , भारतीय दूरदर्शन की सर्वोच्च श्रेणी की नृत्यांगना, भारत के 50 से अधिक सरकारी और गैर सरकारी पुरस्कारों से सम्मानित काजल 35 से अधिक देशों में 46 से अधिक शासनाध्यक्ष और राष्ट्रध्यक्ष के सम्मुख नृत्य प्रस्तुति कर चुकी हैं। काजल विगत 3 दशकों से इंग्लैंड में स्थाई निवास करती हुई कथक नृत्य की जड़ों को मजबूत कर रही हैं। नॉर्थ वेल्स मैनचेस्टर में विश्व हिंदू परिषद की एक संस्था के माध्यम से कथक का बीजारोपण करके सैकड़ों देशी, विदेशी छात्राओं को भारतीय कला संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा देने वाली काजल के सम्मान में कई विदेशी सम्मान भी आकर गौरवान्वित हुए हैं। इनकी प्रशंसा में पंडित बिरजू महाराज कहते हैं... काजल शेरनी हैं, इन्होंने हालातों से कभी समझौता नहीं किया है, और इतने वर्षों तक विदेशों में रहने के बावजूद अपने नृत्य की शुद्धता को बरकरार रखा है । काजल शर्मा ने कथक नृत्य के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं, और अब समय है उनके समुचित मूल्यांकन का
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