Jaat Ka Brahmin - Shlovij | Swar Rap [Lyric Video]
Автор: SHLOVIJ
Загружено: 2024-03-22
Просмотров: 12552
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/ shlovij
ABOUT THIS TRACK ✍️
Jaat Ka Brahmin is one such track in which the artist is talking about himself and is taking some old examples of his religion and karma. In the second verse of this track, the artist has used the sounds of the Hindi alphabet swar. A new experiment has been done which has not been done before by anyone.
LYRICS BREAKDOWN 👇👇
Hook 🪝:-
जात का मैं ब्राह्मण, सोचें beef से डरेगा,
परशुराम दादा जिसके, क्या वो beef से डरेगा,
भिडके एक बार मुझसे फिर तू beef से डरेगा,
खुल्ला गाली पहुंचे कानों में, मैं beep नी करेगा × २
Verse १:-
Shlovij नाम बेटे, क्रोध पे ना *संयम*,
सौ गलती तक मैं राघव (श्रीराम),आगे इसके भोला (महाकाल) *स्वयं*,
अयोध्या लगे ये ताल और कविता(RAP),
मोह गहरा और तीव्र,इसके संग ही हैं *सही हम*।।
बात मान मुझको देनी नहीं है सीख तुझको,
बात मान मुझको देनी नहीं है भीख तुझको,
बात मान मेरे कांधे पर है परशु, ऐसा होता है प्रतीत,मुझको देनी चाहिए BEEF तुझको।।
सुना है व्यंजन तो पीछे रखे स्वर भी क्यों,
आओ सुना दूं लिख के वर्ण तुमको स्वर भी तो,
मेरी आवाज को पीछे से जरा स्वर भी दो,
अ से अ: तलक के मध्य वर्ण स्वर भी लो।।
Hook 🪝:-
जात का मैं ब्राह्मण, सोचें beef से डरेगा,
परशुराम दादा जिसके, क्या वो beef से डरेगा,
भिडके एक बार मुझसे फिर तू beef से डरेगा,
खुल्ला गाली पहुंचे कानों में, मैं beep नी करेगा × २
Verse २:-
🚦🚦*अंत और अनन्त अविनाशी अंधज्ञान अब*
ऋषि-मुनि अधीन ऐसा एक इंसान अनसुलझ
अंश एक अंग एक एतराफ अक्षतम
आधार एहतियात इसमें और उसकी अनछुवन
अर्थ:-
[जन्म मृत्यु खेल सारा एक अंधा ज्ञान
हो जो गुरु के अधीन होता सुलझा वो इंसान
जख्म दूजे अंग, अंश एक पश्चाताप का
बिना छुए ही बरते एहतियात शिष्य मान]
आँख अश्क उतरें उलफते उफान इश्क ए
ऊँचा ऊंट, ईंख ऊंची ईर्ष्यावान अनकहे
अंधकार ए उमंग आभास आज आतिशी
आज अब अभी आघात और उल्टी आदिशी
अर्थ:-
[प्रेम हो उफान पे जो आंख छोड़े नीर तो
ऊंचा होके भी ना ज्ञान, कैसा ज्ञानवीर वो
बनते ज्ञानवृक्ष, अंधकार में है ज्ञान पर
मिलती चोट सीधा सुनलो ऐसे ज्ञानधीर को]
आदमी अनेक अनेक इनकी एकता
अंक आते आधे ईमान इनका एकसा
आसमानी ईर्ष्या इज़ात आँके आंकड़े
अंत अब उफान आया अनकही अनिष्ठता
अर्थ:-
[लोग यहां काफी, दिखाए फिरते ताकते
सारे ही समान, ये अंक आधे आंकते
Hate/ego पहुंची है इनकी आसमान पर
अंत जब निकट तो दिखते फिरते बस ये भागते]
उठती ईंट ऊँची,अटपटे अवाक अनविरत
अंधे आते आड़े उगले और उल्टी अनगिनत
आलसी आवाम और अज्ञात आधी उलफते
ओंछे आए उठके, अनसुलझ अज्ञान अन्त अब
अर्थ:-
[आलसी आवाम भागे ज्ञान से ये दूर अब
ईंट रुकती ईंट पे दीवार को गुरुर तब
पर यहां तो अंधे बनके आते आड़े लोग उल्टे
अंत भी अज्ञान का होना तभी जरूर अब]
अब उगेगा अग्निपुष्प अंत आड़े आएगा
इनायते इंसानी ऐसे आंख अब उठाएगा
उगले अब अंगार अग्नि और अपनी उलझनें
*औचित्यता अनाश अपना अंश अब उगाएगा*🚦🚦
अर्थ:-
[अग्निपुष्प उगते ही विनाश होगा साथ में
इच्छा सबको लोभ की जो साफ दिखता आंख में
बरसेगा अंगार लावा की उठेंगी लहरे तब
जब जाएगा अंत, सुन औचित्यता के हाथ में]
Hook 🪝:-
जात का मैं ब्राह्मण, सोचें beef से डरेगा,
परशुराम दादा जिसके, क्या वो beef से डरेगा,
भिडके एक बार मुझसे फिर तू beef से डरेगा,
खुल्ला गाली पहुंचे कानों में, मैं beep नी करेगा × २
About the artist
Shlovij is an Indian rapper who is known for rapping in pure Hindi and Sanskrit language. Along with this, Shlovij keeps experimenting with the medium of his rap. After writing rap like Vyanjan and Alnakar, this time Shlovij has written Swar rap.
Jai Shree Ram🙏
CREDITS:
Written & Performed by- Shlovij
Produced by- Shaks Mine
/ shaks_mine
Mixed & Mastered by- LXSH
/ lxshmusic
Artwork & Video- Sort pixel
/ sortpixel
Distribution Partner- Fhigh Entertainment
/ fhigh.official
Digitally Powered by- Sarvinarck Music
/ sarvinarck
Special Thanks- Khullar G
/ thekhullarg
#shlovij #jaatkabrahman #swarrap
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