सोने के पिंजरे में तोता खुश नहीं रहता…वैसे ही यह आत्मा भी इस शरीर के पिंजरे में तड़पती है!
Автор: sukoon antrman ka ,
Загружено: 2026-02-15
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सोने का पिंजरा चाहे जितना सुंदर क्यों न हो,
तोता उसमें बंधा हुआ खुश नहीं रह सकता।
उसे बाहर खुले आकाश की तड़प रहती है।
ठीक उसी प्रकार,
यह शरीर भी आत्मा के लिए एक पिंजरा है।
आत्मा रूपी मन को अपने वास्तविक घर,
निराकार परमात्मा से मिलने की गहरी तड़प होती है।
यह तड़प तभी शांत होती है
जब आत्मा को सच्चे सतगुरु (सरकार सतगुरु) का मार्गदर्शन मिलता है।
इस विचार में समझिए —
आत्मा क्यों बेचैन है,
और परमात्मा से मिलन ही जीवन का असली उद्देश्य क्यों है।
👉 पूरा विचार ध्यान से सुनिए, जीवन का दृष्टिकोण बदल सकता है।
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Повторяем попытку...
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