स्वर्गीय देवनारायण प्रसाद कुशवाहा का अंतिम श्राद्ध कार्यक्रम आज समाज के पुरोहित द्वारा सिरहा में....
Автор: DAINIK AYODHYA TIMES BIHAR
Загружено: 2025-11-17
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स्वर्गीय देवनारायण प्रसाद कुशवाहा का अंतिम श्राद्ध कार्यक्रम आज समाज के पुरोहित द्वारा सिरहा में संपन्न करवाई गई।
--श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान आर्य समाज के पुरोहित ने सर्वप्रथम स्वर्गीय देवनारायण प्रसाद के पुत्र रमेश प्रसाद को जनेऊ धारण कराया उसके उपरांत अपने मंत्रों उच्चारण के साथ अग्नि हवन के द्वारा कार्यक्रम संपन्न करवाया।
रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार
सिरहाकोठी 17 नवंबर 2025-सिरहाकोठी:-स्वर्गीय देवनारायण प्रसाद कुशवाहा का जन्म 1934 में सिरहा पंचायत में हुआ था। एक पिता के दो पुत्र में देवनारायण प्रसाद डाकप्यून साहेब के नाम से विख्यात थे और दूसरा भाई श्री नारायण प्रसाद उर्फ कमांडर साहब के नाम से विख्यात थे। पहले श्री नारायण प्रसाद उर्फ कमांडर साहब इस भुवन को छोड़कर चल बसे। दिनांक 6-11-2025 को श्री देवनारायण प्रसाद कुशवाहा की सामान्य मृत्यु हुई।
श्री देवनारायण प्रसाद उर्फ डाकप्यून साहब के जीवनी के बारे में कार्यक्रम में उपस्थित कन्हैया प्रसाद सिंह कुशवाहा एवं शिक्षक मनीष कुमार कुशवाहा ने विस्तार पूर्वक बताया। कन्हैया प्रसाद सिंह कुशवाहा ने बताया कि देवनारायण प्रसाद एक बहुत ही खुश मिजाज और मिलनसार व्यक्ति थे जब मैं आठवां में पढ़ रहा था उसे समय वह पोस्ट ऑफिस में पियून साहब के पद पर नौकरी करते थे। उसे समय डाकखाना स्वर्गीय रामसेवक प्रसाद के घर में चल रही थी। मैं जब इस रास्ते से अपने घर जाता था तो वह हमको बुलाकर कहते थे ऐ कन्हैया जरा हई लिख पढ़ दो, और मैं लिख पढ़ देता था। आगे उन्होंने बताया कि देवनारायण प्रसाद के जीवन काल में मैं समझता हूं कि किसी भी व्यक्ति से उनका विवाद नहीं हुआ होगा। वह सबसे मिलकर सबके खुशी में खुश रहकर जीवन बिताने वाले व्यक्ति थे। शिक्षक मनीष कुमार कुशवाहा ने बताया कि हमारे घर में जिस समय डाकखाना चलता था उसे समय सिरहा मठिया कटास सुंदर पट्टी आदि जगहों से लोग एक सुबह आकर लाइन में लगते थे। सभी लोगों का कार्य पियून साहेब यानी देवनारायण प्रसाद कुशवाहा कुशलता पूर्वक निपटाकर सबको खुशी-खुशी भेज देते थे। वह सीन हमने देखा है।
आज वही व्यक्ति स्वर्गीय देवनारायण प्रसाद का मृत्यु के उपरांत श्राद्ध कार्यक्रम का आयोजन से रमेश प्रसाद के दरवाजे पर आर्य समाज के द्वारा आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में रामभरोस प्रसाद चिंतामणपुर के रहने वाले से जब सनातन धर्म और आर्य समाज के बारे में जब पूछा गया उन्होंने बताया कि पहले आर्य समाज का उत्पत्ति हुआ था। वहीं पर कन्हैया प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि पहले सनातन धर्म का उत्पत्ति हुआ था। अब दोनों की विषय को लेकर जब गूगल से पूछा गया तो गूगल ने बताया कि पहले से सनातन धर्म है 1875 में आर्य समाज की स्थापना सनातन धर्म में हो रहे बुराइयों को दूर करने के उद्देश्य से हुआ है।
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